सूचीबद्ध हॉस्पिटैलिटी फर्मों में से ज्यादातर ने जून तिमाही में प्रति कमरे राजस्व के लिहाज से खासा सुधार दर्ज किया है। लेकिन यह सुधार तभी नजर आता है जब हम सालाना आधार पर प्रदर्शन पर नजर डालते हैं। पिछले साल की पहली तिमाही में राष्ट्रीय स्तर पर लगे लॉकडाउन से झटका लगा था और तिमाही दर तिमाही तुलना करने पर पता चलता है कि भारतीय हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की सुधार की राह लंबी है। अन्य क्षेत्रोंं के साथ इस क्षेत्र को भी कोविड महामारी से बड़ा झटका लगा है।
कंपनियों के प्रबंधन का मानना है कि माह दर माह रिकवरी जारी है और अगर तीसरी लहर नहीं आती है तो अगले 6 से 9 महीने में होटल महामारी के पूर्व स्तर पर पहुंच जाएंगे। 9 अगस्त को निवेशकों से बातचीत में इंडियन होटल्स के प्रबंध निदेशक व सीईओ पुनीत चटवाल ने कहा था, जुलाई का महीना पिछले तीन महीनों से बेहतर रहा है और उन्हें उम्मीद है कि यह प्रवृत्ति जारी रहेगी।
चटवाल ने कहा था, जून में बेहतरी शुरू हुई थी। महामारी की दूसरी लहर में कोविड के मामले चार गुना बढऩे के बाद महामारी की शुरुआत के मुकाबले काफी कम समय में सुधार देखने को मिला। इंडियन होटल कंपनी लिमिटेड का एकल राजचस्व सालाना आधार पर 118 फीसदी बढ़ा, जिसे प्रति कमरे राजस्व में 101 फीसदी सुधार से सहारा मिला। अन्य ब्रांडों के अलावा ओबेरॉय का मालिकाना हक रखने वाली ईस्ट इंडिया होटल्स ने कहा कि अहम शहरों में हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र ने यात्रा में माह दर माह सुधार दर्ज किया है। जून 2021 में मुंबई में कमरे सबसे ज्यादा भरे रहे (51-53 फीसदी), जिसके बाद दिल्ली का स्थान रहा (39-41 फीसदी)। कंपनी ने निवेशकों से बातचीत में यह जानकारी दी।
नियोसिस कैपिटल ऐंड एडवाइजर्स के सीईओ नंदीवर्धन जैन ने कहा, होटल कारोबार पर अगली दो-तीन तिमाही तक संकट रहेगा क्योंकि आईटी जैसे क्षेत्र वर्क फ्रॉम होम जारी रखे हुए हैं और बैठक, कॉन्फ्रेंस, एग्जिबिशन आदि पर पाबंदी का भी असर पड़ा है। ज्यादातर बैठकेंवर्चुअल हो रही हैं। लेकिन विनिर्माण वाले इलाकों के होटल ने मांग में बढ़ोतरी देखी है।