facebookmetapixel
एक भारत, श्रेष्ठ भारत का जीवंत प्रतीक है काशी-तमिल संगममसरकारी दखल के बाद भी ‘10 मिनट डिलिवरी’ का दबाव बरकरार, गिग वर्कर्स बोले- जमीनी हकीकत नहीं बदलीभारतीय सिनेमा बनी कमाई में ‘धुरंधर’; बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ₹13,397 करोड़, गुजराती और हिंदी फिल्मों ने मचाया धमालInfosys ने बढ़ाया रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान, डील पाइपलाइन मजबूत; मुनाफा नई श्रम संहिता से दबाव मेंस्मार्टफोन निर्यात में भारत का नया रिकॉर्ड, 2025 में 30 अरब डॉलर के पार; iPhone की 75% हिस्सेदारीQ3 Results: Groww का मुनाफा 28% घटा, लेकिन आय बढ़ी; HDFC AMC का लाभ 20% उछलासोना-चांदी के रिकॉर्ड के बीच मेटल शेयर चमके, वेदांत और हिंदुस्तान जिंक ने छुआ नया शिखरमहंगाई नरम पड़ते ही सोना रिकॉर्ड पर, चांदी पहली बार 90 डॉलर के पारकमाई के दम पर उड़ेगा बाजार: इलारा कैपिटल का निफ्टी के लिए 30,000 का टारगेटम्युचुअल फंड्स में डायरेक्ट प्लान का जलवा, 2025 में AUM 43.5% बढ़ा

कर्ज की मार, कैसे हो टीवी-फ्रिज का सपना साकार!

Last Updated- December 07, 2022 | 4:07 PM IST

त्योहारों का मौसम दस्तक दे रहा है, लेकिन महंगाई की मार झेल रहे टिकाऊ उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियों और विक्रेताओं के चेहरे से खुशी गायब है।


वजह- स्टील के बढ़ते दाम के कारण इन सामान की तेजी से बढ़ती लागत। ऐसे में, उद्योग को पहले ही ग्राहकों की बेरुखी का सामना करना पड़ रहा है। ऊपर से, इन उपकरणों को खरीदने के लिए लोन देने वाली फाइनैंस कंपनियों और बैंकों के हाथ पीछे खींच लेने से हालात और खराब होने के आसार हैं।

लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट स्थित कंज्यूमर डयूरेबल्स की रिटेल शृंखला ‘नेक्स्ट’ के शुभांशु त्रिपाठी ने बताया, ‘पहले आईसीआईसीआई, जीई, श्रीराम फाइनैंस और बजाज जैसी कंपनियां फाइनैंस करती थीं, लेकिन अब तो कई कंपनियों ने अपने हाथ खींच लिया है। इसलिए ग्राहकों की तादाद भी तेजी से कम हो रही है।’

सेंट्रल मार्केट में ही पैनासोनिक के एक्सक्लूसिव शोरूम ‘क्रिस इलेक्ट्रॉनिक्स’ के स्टोर मैनेजर विपिन ने बताया, ‘आईसीआईसीआई, जीई जैसी बड़ी फाइनैंस कंपनियों का कंज्यूमर डूयरेबल के बाजार से मुंह मोड़ने की वजह से सेल्स में करीब 10 फीसदी की गिरावट आई है। सबसे ज्यादा असर तो 50,000 रुपये से ज्यादा कीमत वाले प्रीमियम श्रेणी के एलसीडी टेलीविजन की बिक्री पर पड़ा है।’

एलजी के शोरूम ‘आरवी इलेक्ट्रॉनिक्स’ के सुरेश जोशी ने बताया, ‘पहले 10-20 फीसदी ग्राहक ऐसे आते थे, जो अगर घर से  21 इंच का टीवी खरीदने के इरादे से आते थे तो फाइनैंस की सुविधा के कारण वे 29 इंच का टीवी भी खरीद लेते थे, जबकि अब ऐसा मुमकिन नहीं हो पाता है।’ वैसे, फाइनैंस कंपनियों के अलग होने से स्टोरों में आने वालों की तादाद में तो कमी नहीं आई है, लेकिन ग्राहकों की संख्या जरूर घटी है।

एसी वितरण से जुड़ी अल्टीमेट सॉल्यूशंस के मालिक रवि आनंद का कहना है कि फाइनैंस कंपनियों के इस सेक्टर से मुंह मोड़ने की बड़ी वजह मार्जिन घटना है। हालांकि कंज्यूमर डयूरेबल बाजार से ज्यादातर फाइनैंस कंपनियां पीछे हट रही हैं, लेकिन बजाज फाइनैंस लोगों को लोन मुहैया करा रही है। और तो और कंपनी जो लोन पहले 2-3 दिन में देती थी, अब वहीं लोन कंपनी महज 15 मिनट में दे रही है।

इस बारे में बजाज फाइनैंस के रणधीर यादव बताते हैं, ‘कंपनी की सोर्सिंग अच्छी है, इसीलिए हम अभी भी लोगों को लोन मुहैया करा रहे हैं।’ कंज्यूमर डयूरेबल्स के लिए लोन मुहैया कराने वाली कंपनी श्रीराम सिटी यूनियन फाइनैंस के एक कार्यकारी के अनुसार, कंपनी अब भी लोन मुहैया करा रही है, लेकिन ज्यादा सावधानी बरत रही है। इस बाजार से निकलने वाली आईसीआईसीआई, जीई, सिटी ग्रुप से बात  नहीं हो पाई।

फाइनैंस कंपनियों ने कंज्यूमर डयूरेबल उपभोक्ताओं को ऋण देने से पल्ला झाड़ा
ब्याज दर में इजाफा से डिफॉल्टरों की संख्या बढ़ने के खतरे से कंपनियों ने उठाए कदम
कंज्यूमर डयूरेबल कंपनियों की बिक्री पर पड़ रहा है असर

First Published - August 11, 2008 | 2:40 AM IST

संबंधित पोस्ट