सीमा पर जारी तनाव के कारण भारत चीन से होने वाले आयातों पर अपनी निर्भरता को लेकर पुनर्विचार करने को मजबूर हुआ है। घरेलू कंपनियों पर निर्भरता बढ़ाने की आवाज जोर शोर से उठाई जा रही है। लेकिन विगत छह महीने में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की ओर से चीनी कंपनियों को दिए गए ठेकों पर करीब से नजर डालने पर अलग ही कहानी नजर आती है।
स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया (सेल) और भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) जैसे भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) भी चीन से आयात करते हैं। इसके अलावा, चीन से भारत का आयात केवल सामान के किफायती होने के कारण ही नहीं है बल्कि योग्य घरेलू बोलीदाताओं और तकनीक या दूसरे तजुर्बे की कमी के कारण से भी है।
सार्वजनिक दायरे में मौजूद आंकड़ों के आधार पर बिजनेस स्टैंडर्ड को ऐसे 30 ठेकों का पता चला है जो सेल, बीएचईएल, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन (पीजीसीआईएल) और तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) ने चीनी कंपनियों को दिए हैं। ये ठेके इस साल जनवरी से दिए गए थे जब चीन कोविड-19 महामारी की गिरफ्त में आ रहा था। इनमें से 23 ठेके बीएचईएल ने दिए थे।
इन 30 ठेकों का संयुक्त मूल्य 117 करोड़ रुपये है जो कि बहुत अधिक नहीं है। संभव है कि यह कोई पूर्ण सूची नहीं है और इन कंपनियों ने भी कई दूसरी परियोजनाएं घरेलू और विदेशी कंपनियों को दिए हैं। ये आंकड़े कंपनी की वेबसाइटों पर उपलब्ध हासिल किए गए ठेकों के विवरण से मिले हैं।
17 जून को वेदांत रिसोर्सेज के चेयनमैन अनिल अग्रवाल ने ट्वीट कर कहा, ‘भारत में अधिकांश बिजली संयंत्र चीन से आयात किए जाते हैं जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम बीएचईएल संसार में सर्वोत्तम बिजली संयंत्रों के उत्पादन में सक्षम है। यदि इसे पूर्ण स्वायत्तता दे दी जाए और बिना किसी कर्मचारी की छंटनी किए या तो इसका निगमीकरण अथवा निजीकरण कर दिया जाए तो यह आत्मनिर्भर भारत के लिए आश्चर्यजनक परिणाम दे सकती है।’ हालांकि, बीएचईएल के निविदा दस्तावेजों से पता चलता है कि यह भी चीन से अपने कुछ कच्चे मालों का आयात करती है। बीएचईएल ने चीनी कंपनियों को जो ठेके दिए हैं उनमें या तो कोई योग्य बोलीदाता नहीं था या फिर अधिकांश योग्य बोलीदाता चीनी कंपनियां थीं। ये 23 ठेके फ्यूल गैस डीसल्फेटाइजेशन (एफजीडी) मदों या ट्यूबों और अन्य फिटिंग के सामानों से जुड़ी थी। बीएचईएल की वेबसाइट पर दिए गए समझौता विवरण में एफडीजी मदों को एकल स्वीकृत पेशकशों या ऐसे जिनमें कोई दूसरा योग्य बोलीदाता नहीं था, के तौर पर चिह्नित किया गया था।
बीएचईएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक से कंपनी द्वारा चीन से किए जाने वाले वार्षिक आयातों और क्या वह अपनी नीति में बदलावों पर विचार कर रही है, के बारे में जानने के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया।
शुक्रवार को ऊर्जा मंत्रालय ने सुरक्षा और साइबर खतरे का हवाला देते हुए बिजली आपूर्ति प्रणालियों और नेटवर्कों में लगाए जाने वाले उपकरणों के आयात पर रोक लगाने की घोषणा की थी।
वेबसाइट पर उपलब्ध निविदा की जानकारियों से पता चलता है कि फरवरी में, पावर ग्रिड कारपोरेशन ने 7.28 करोड़ रुपये का एक छोटा ठेका एक चीनी कंपनी को दी थी। यह ठेका एक कंपोजिट इन्सुलेटर पैकेज के लिए दिया गया था। ठेका देने के विवरण से पता चलता है कि इस परियोजना के लिए छह पक्षों ने बोली दी थी जिसमें से दो इसके लिए योग्य नहीं पाए गए थे, जिनमें से एक बीएचईएल थी।
बीएचईएल के अलावा, भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात निर्माता सेल की आपूर्ति या विक्रेता सूची में भी चीनी कंपनियां शामिल हैं। जनवरी से अप्रैल के बीच सेल ने चीनी कंपनियों को पांच ठेके दिए थे। इसके बारे में जानने के लिए सेल को भेजे गए प्रश्न का जवाब नहीं आया।
सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बुनियादी ढांचा की परियोजनाओं के लिए चीनी कंपनियां अक्सर भारतीय कंपनियों के साथ कंसोर्टियल पार्टनर होती हैं। उदाहरण के लिए मुंबई मेट्रो परियोजना में एक पैकेज के लिए टाटा प्रोजेक्ट्स का चाइना हार्बर इंजीनियरिंग (सीएचईसी) के साथ एक संयुक्त उद्यम है। कंपनी ने इसे एक ऐतिहासिक बोली पूर्व गठजोड़ कहा था जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के तरीके को समझने में सहाय?कसाबित हुआ।
(साथ में अदिति दिवेकर)