महंगाई की मार, चुंगी और वैट की चोट के साथ सरकारी उपेक्षा की वजह से देश की सबसे बड़ी हीरे की मंडी मुंबई से खिसक कर सूरत में चमकने की पूरी तैयारी कर चुकी है।
पिछले 6-7 महीनों के दौरान मुंबई के हीरा कारोबार में करीबन 40 फीसदी की कमी आई है। व्यापारियों के अनुसार, अगर महाराष्ट्र सरकार अपनी नीतियों में सुधार नहीं करती है, तो साल के अंत तक राज्य में कुल कारोबार का सिर्फ 30 फीसदी ही रहा जाएगा।
मुंबई में कहीं भी हीरे की कटिंग का प्लांट लगाने के लिए उसका किराया कम से कम 40-50 हजार रुपये महीना देना पड़ता है, जबकि सूरत में उतनी ही जगह 10-15 हजार रुपये में उपलब्ध है। इसके अलावा, महाराष्ट्र में हीरे के कारोबारियों को 1 प्रतिशत वैट और 2 फीसदी चुंगी भी अदा करनी पड़ती है, जबकि गुजरात में हीरे के कारोबरियों को यह कर नहीं देना पड़ता है।
व्यापारियों की लंबे समय से मांग रही है कि इस कारोबार को इन करों से मुक्त कर दिया जाए। इसके पीछे तर्क है कि यह कारोबार मूल्य वर्धित होने कीवजह से इसमें एक-दो फीसदी का कर भी बहुत ज्यादा फर्क डालता है। महंगाई और कर के अलावा, तीसरी बड़ी समस्या यूनियनबाजी है।
हीरे के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि कभी-कभी कारोबारियों को भारी घाटा होने या फिर दूसरी कुछ वजहों से यहां पर कारखाने बंद करना बहुत मुश्किल होता है। गुजरात में ऐसी स्थिति नहीं है। मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र की अपेक्षा सूरत समेत गुजरात के अन्य शहरों में मजदूरी 20 से 30 फीसदी सस्ती है और कुशल मजदूर आसानी से मिल जाते हैं।
इंडियन कैपिटल फर्म के चेयरमैन संजय शाह के अनुसार, देश में हीरे का कुल कारोबार 60 से 75 हजार करोड़ रुपये का है। इसके साथ ही ज्वेलरी का कारोबार सालाना करीब 25 हजार करोड़ रुपये का है। इसमें से 70 हजार करोड़ रुपये का हर साल निर्यात किया जाता है।
शाह के मुताबिक, विदेशों से आने वाले कच्चे हीरे सबसे पहले मुंबई आते थे, इसके बाद देश के दूसरों हिस्सों में स्थित कारखानों में तराशने के लिए भेजे जाते थे। हीरों की कटिंग और पॉलिश होने के बाद उन्हें फिर से मुंबई भेजा जाताा था। इसके बाद विदेशों को इनका निर्यात किया जाता था। लेकिन गुजरात की मोदी सरकार ने मुंबई के इस एकछत्र राज को तोड दिया है।
अब सूरत में विदेशों से सीधे माल आता है और तैयार होने के बाद उसे वहीं से निर्यात कर दिया जाता है। सूरत में यह सुविधा मिलने की वजह अधिकांश कारोबारियों ने अपना काम वहां शुरू कर दिया है। नतीजा, इस साल महाराष्ट्र के कुल हीरे के कारोबार में से 70 फीसदी खिसक कर गुजरात जा सकता है।
दी नवीन चन्द्र एंड कंपनी के नवीन भाई मेहता का कहना है कि मुंबई में चुंगी और बढ़ती महंगाई की वजह से कारोबारियों ने गुजरात के सूरत, अमरेली, भावनगर, बोटाद और अन्य शहरों में कारखाने लगाए जरूर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मुंबई में हीरे का कारोबार पूरी तरह बंद हो जाएगा।
गौरतलब है कि 70 हजार रुपये का सालाना निर्यात करने वाला भारत दुनिया का इकलौता देश है। इस उद्योग में तकरीबन 20 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है, वहीं सीधे तौर पर देश के5000 व्यापारी जुड़े हुए हैं। जिनसे सालाना करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है।
6-7 महीनों के दौरान मुंबई के हीरा कारोबार में करीबन 40 फीसदी की गिरावट
महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों से सूरत में शिफ्ट हो रहे हीरे के कारोबारी
सस्ता श्रम, किराया और कर में छूट है इसकी अहम वजह