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कॉक्स ऐंड किंग्स के परिसरों की तलाशी

Last Updated- December 15, 2022 | 8:00 PM IST

येस बैंक धोखाधड़ी मामले में जांच का दायरा बढ़ाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आज वैश्विक ट्रैवल फर्म कॉक्स ऐंड किंग्स के प्रवर्तकों, निदेशकों और ऑडिटरों के पांच परिसरों की तलाशी ली। यह तलाशी येस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर के साथ टूर ऑपरेटर के वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। कपूर फिलहाल धनशोधन मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार ट्रैवल फर्म को कुल 3,642 करोड़ रुपये के कर्ज की मंजूरी देने में अनियमितता का पता चला है। ईडी ने कहा, ‘जांच के दौरान कॉक्स ऐंड किंग्स समूह को ऋण आवंटन में अनियमितता का पता चला। समूह ने देश में और विदेश में कई सहायक इकाइयों का जाल बुना, जिसके जरिये पैसों का हेरफेर किया गया।’
येस बैंक द्वारा 18 मार्च को ट्रैवल फर्म के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के बाद तलाशी अभियान चलाया गया। ईडी के एक अधिकारी ने कहा, ‘हमने अभी तक प्रवर्तक अजय अजीत पीटर, निदेश पेसी पटेली, मुख्य वित्त अधिकारियों अभिषेक गोयनका और अनिल खंडेलवाल तथा ऑडिटर नरेश जैन के कार्यालयों एवं आवासों की तलाशी ली है।
सूत्रों ने कहा कि ईडी की यह कार्रवाई येस बैंक के करीब आधा दर्जन लेनदारों की जांचका हिस्सा है, जिन पर बैंक का करीब 30,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। ईडी इसकी जांच कर रहा है कि बैंक ने ऋण किस तरह से मंजूर किया और ट्रैवल फर्म के प्रवर्तकों ने उस पैसे को कैसे दूसरी जगह ले गए। साथ ही कर्ज देने में रिश्वत के संदेह की भी जांच की जा रही है।
सूत्रों ने संकेत दिए कि जांच की आंच उन सभी लेनदारों तक पहुंचेगी, जिन्हें एजेंसी ने पूछताछ के लिए समन दिया था लेकिन कोरोनावायरस के कारण पूछताछ टल गई। एजेंसी दूसरा या पूरक आरोप पत्र भी तैयार कर रहा है, जिसमें बैंक के कर्जदारों से मिली जानकारियों को शामिल किया जाएगा।
बकाये कर्ज का विवरण देते हुए ईडी ने कहा कि कॉक्स ऐंड किंग्स ने 563 करोड़ रुपये लिए थे, वहीं इस समूह की फर्मों ईजीगो ने 1,012 करोड़ रुपये और कॉक्स ऐंड किंग्स फाइनैंशियल सर्विसेज 422 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इसके अलावा इसकी दो अमेरिकी इकाइयों – प्रोमेथॉन एंटरप्राइजेज पर 1,152 करोड़ रुपये और मालवेरन ट्रेवल पर 493 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है।
कॉक्स ऐंड किंग्स के प्रवर्तकों, कार्याधिकारियों और इसकी अन्य इकाइयों की भूमिका से संबंधित अहम दस्तावेज और ऑडिट रिपोर्ट मिलने के बाद ईडी ने यह कार्रवाई की है।
जांच में पता चला है कि मालवेरन ट्रैवल पर 493 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है और कर्ज लेने के लिए उसने येस बैंक को फर्जी बैंक विवरण और ऑडिटर प्रमाण पत्र दिए थे। इस फर्जीवाड़े के बारे में केपीएमजी ने पता लगाया था, जो इस इकाई की एडमिनिस्ट्रेटर है। प्रोमैथॉन एंटरप्राइजेज ने भी इसके लिए भ्रामक डोमेन नेम का इस्तेमाल किया था।
कॉक्स ऐंड किंग्स के भुगतान में चूक करने के बाद बैंक ने पीडब्ल्यूसी को फॉरेेंसिक ऑडिट के लिए नियुक्त किया लेकिन कंपनी के प्रबंधन ने उसके साथ सहयोग नहीं किया। हालांकि ऑडिट फर्म ने सीमित उपलब्ध डेटा के आधार पर खातों में फर्जीवाड़े की पुष्टि की। ऑडिट में यह भी बताया गया कि वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2019 के बीच 3,908 करोड़ रुपये के सौदे 15 गैर-मौजूद/फर्जी ग्राहकों के साथ किए गए थे।
समूह की एक अन्य कंपनी ईजीगो के खाते में दर्ज अधिकांश पैसे बैंक के विवरण में नहीं पाए गए। इसके अलावा 147 ऐसे और ग्राहक पाए गए जिनका कोई अता-पता नहीं है। ऑडिट में यह भी कहा गया कि अनिल खंडेलवाल ने 1,100 करोड़ रुपये आलोक इंडस्ट्रीज में बोर्ड की मंजूरी के बिना लगा दिए।
कॉक्स ऐंड किंग्स ने अपनी एक सहायक इकाई हॉलिडे ब्रेक एजुकेशन को 4,387 करोड़ रुपये में बेच दिया लेकिन इससे मिले पैसों से उसने बैंक का कर्ज नहीं चुकाया बल्कि अधिकांश पैसों को दूसरी जगह लगा दिया। करीब 1.53 करोड़ डॉलर रकम कुबेर इन्वेस्टमेंट मॉरीशस प्रा. लि. को हस्तांतरित कर दिया। इस कंपनी का नियंत्रण पीटर केरकर के पास था।

First Published - June 8, 2020 | 10:42 PM IST

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