सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का कोरोनावायरस रोधी टीका कोवोवैक्स अब देश भर में बच्चों के लिए उपलब्ध है। यह जानकारी कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने मंगलवार को दी। पूनावाला ने ट्वीट करके कहा कि नोवावैक्स द्वारा विकसित कोवोवैक्स, ‘अब भारत में बच्चों के लिए उपलब्ध है।’ उन्होंने कहा, ‘यह भारत में निर्मित एकमात्र टीका है जो यूरोप में भी बेचा जाता है और इसकी प्रभावशीलता 90 प्रतिशत से अधिक है।’ पूनावाला ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हमारे बच्चों की सुरक्षा के लिए एक और टीका उपलब्ध कराने की दृष्टि’ के अनुरूप है।
आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को कहा था कि अब 12-17 आयुवर्ग के बच्चे निजी केंद्रों पर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) का कोविड-रोधी टीका ‘कोवोवैक्स’ लगवा सकते हैं और इस संबंध में कोविन पोर्टल पर प्रावधान किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया था कि कोवोवैक्स की एक खुराक के लिए 900 रुपये और इस पर जीएसटी का भुगतान करना होगा। इसके अलावा अस्पताल के सेवा शुल्क के तौर पर 150 रुपये अदा करने होंगे। टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श समूह (एनटीएजीआई) द्वारा 12-17 आयुवर्ग के बच्चों को कोविड-रोधी टीके की खुराक दिए जाने की सिफारिश के बाद यह कदम उठाया गया। भारत के औषधि नियामक ने पिछले साल 28 दिसंबर को वयस्कों में आपातकालीन स्थितियों में सीमित उपयोग के लिए कोवोवैक्स को मंजूरी दी थी और 9 मार्च को कुछ शर्तों के अधीन 12-17 आयु वर्ग में उपयोग की अनुमति दी थी।
बच्चों के टीके पर अदालत फैसला नहीं दे सकती: शीर्ष न्यायालय
उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि बच्चों के टीकाकरण की सुरक्षा के संबंध में अग्रणी वैज्ञानिक विश्लेषण पर अदालत फैसला नहीं दे सकती और देश में बच्चों को टीका लगाने का केंद्र का निर्णय वैश्विक वैज्ञानिक मत तथा विशेषज्ञ निकायों के अनुरूप है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई के पीठ ने यह भी कहा कि आंकड़े बताते हैं कि टीके से बच्चों के लिए कोई खतरा नहीं है। न्यायालय ने कहा, ‘विज्ञान के विशेषज्ञों की सुरक्षा और संबद्ध पहलुओं से संबंधित मामलों पर निर्णय लेते समय अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन इससे न्यायालय को विशेषज्ञ राय के बारे में अनुमान लगाने का अधिकार नहीं मिल जाता, जिसके आधार पर सरकार ने अपनी नीतियां तैयार की हैं।’
पीठ ने कहा, ‘भारत सरकार का इस देश में बच्चों का टीकाकरण करने का निर्णय वैश्विक वैज्ञानिक मत के अनुरूप है और डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ तथा सीडीसी जैसे विशेषज्ञ निकायों ने भी बच्चों के टीकाकरण की सलाह दी है।’ केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) और रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) जैसी एजेंसियों द्वारा बच्चों के टीकाकरण की सलाह दी गई है। इसने कहा था, ‘भारत में बच्चों के टीकाकरण के पक्ष में विशेषज्ञों की राय वैश्विक मत के अनुरूप है। हमें सूचित किया गया है कि 12 मार्च 2022 तक 15 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों को कोवैक्सीन की 8,91,39,455 खुराक दी गई हैं। टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव (एईएफआई) की 1,739 छोटी शिकायतें, 81 गंभीर शिकायतें और छह अत्यंत गंभीर शिकायतें हैं।’
शीर्ष अदालत ने कहा कि भारत सरकार के अनुसार, उक्त आंकड़ों से पता चलता है कि टीका बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है। पीठ ने कहा, ‘यदि यह न्यायालय इस तरह की विशेषज्ञ राय की सटीकता की जांच करता है तो यह न केवल हमारे अधिकार क्षेत्र से बाहर होगा, बल्कि खतरनाक भी होगा। जैसा कि पहले ही कहा गया है, न्यायिक समीक्षा का दायरा अदालत को इस तरह के दुस्साहस करने के लिए बाध्य नहीं करता है।’ उच्चतम न्यायालय ने याची की इस दलील को खारिज कर दिया कि इस अदालत को बच्चों के टीकाकरण के मामले में इस आधार पर हस्तक्षेप करना होगा कि यह अवैज्ञानिक है। यह फैसला टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह के पूर्व सदस्य डॉ. जैकब पुलियेल द्वारा दायर एक याचिका पर आया, जिन्होंने टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव की घटनाओं के संबंध में आंकड़ों का खुलासा करने का निर्देश दिए जाने का आग्रह किया था।