रेटिंग एजेंसी मूडीज ने बुधवार को कहा कि कंपनियां कोविड-19 महामारी के बाद भारत में पैदा हुए आर्थिक दबाव से नहीं बच पाएंगी। हालांकि कॉरपोरेट ऋणों से जोखिम अब 2012-19 की अवधि के मुकाबले कम है और कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में परिसंपत्ति गुणवत्ता और वित्तीय प्रोफाइल सुधारने के लिए कदम उठाए हैं।
कोरोनावायरस महामारी से पैदा हुई समस्या से परिवारों और छोटे व्यवसायियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ेगा। मूडीज ने एक बयान में कहा है, ‘जहां देश की आर्थिक मंदी के बीच भारतीय बैंकों के लिए परिसंपत्ति गुणवत्ता जोखिम बढ़ रहा है, वहीं कॉरपोरेट ऋणों से जोखिम पिछले क्रेडिट चक्र से घटा है।’
मूडीज के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ क्रेडिट ऑफिसर श्रीकांत वाडलामणि ने कहा, ‘कंपनियां कोरोनावायरस महामारी से पैदा हुए मौजूदा आर्थिक दबाव से प्रतिरक्षित नहीं रह पाएंगी। कंपनियों के लिए अल्पावधि दबाव जून 2020 तिमाही में बेहद कमजोर प्रदर्शन के तौर पर पहले ही दिख चुका है।’ उन्होंने कहा, ‘कमजोर वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों के लिए ऋण जोखिम को एनपीए के तौर पर चिह्नित किया जा चुका है, वहीं मौजूदा ऋण दबाव का मुकाबला करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।’
पिछले कुछ वर्षों में उधारी पूंजीगत खर्च में कमजोरी के बीच मजबूत कंपनियों तक सीमित हुई है, जबकि बैंक भी कर्जदारों के चयन में काफी सतर्कता बरत रहे हैं। कॉरपोरेट क्षेत्रों में, वित्त और रियल एस्टेट कंपनियों (जिनकी कुल बैंक ऋणों में बड़ी भागीदारी है) के लिए ऋण ज्यादा जोखिम से जुड़े हुए हैं। इन दोनों क्षेत्रों को परिचालन नकदी प्रवाह संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि महामारी और लॉकडाउन की वजह से जो क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, उनमें परिवहन और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्र भी मुख्य रूप से शामिल हैं।