सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर) के विनिवेश में निवेशकों की दिलचस्पी का अंदाजा लगाने के लिए निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) संभावित बोलीदाताओं के वास्ते अभिरुचि पत्र से पहले इस सप्ताह रोडशो आयोजित करेगा।
सूत्रों ने कहा कि इस बैठक में डीपी वर्ल्ड, अदाणी समूह, वेदांत समूह, पीएसए इंटरनैशनल, गेटवे डिस्ट्रिपार्क्स, ऑलकार्गो लॉजिस्टिक्स, पोर्ट ऑफ सिंगापुर तथा निवेश दिग्गज कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड को आमंत्रित किया जा सकता है। बैठक का मकसद यह है कि अभिरुचि पत्र आमंत्रित करने से पहले अगर संभावित बोलीदाताओं की जमीन लाइसेंस शुल्क संबंधित किसी तरह की कोई चिंता हो तो उसे दूर किया जा सके।
घटनाक्रम के जानकार एक सूत्र ने कहा, ‘2019 में कॉनकॉर के विनिवेश में सबसे बड़ी अड़चन जमीन का लाइसेंस शुल्क था। अब इस मसले को हल कर लिया गया है और दीपम तथा लेनदेन सलाहकार डेलॉयट कंपनी में निवेशकों की दिलचस्पी का अंदाजा लगाना चाहते हैं।’ एक अन्य सूत्र ने कहा कि बैठक 18 से 21 अक्टूबर के बीच हो सकती है और इसमें रेल मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं।
पिछले महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक नीति को मंजूरी दी थी जिसके तहत रेलवे की जमीन का लाइसेंस शुल्क बाजार मूल्य के मौजूदा 6 फीसदी से घटाकर 1.5 फीसदी सालाना कर दिया गया है। इसके बाद 4 अक्टूबर को परिपत्र जारी कर स्पष्ट किया गया कि मौजूदा भू-धारक अपने पट्टे को और 35 साल के लिए बढ़ा सकते हैं।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘लेनदेन सलाहकार कुछ रोडशो आयोजित कर रहा है। जमीन पट्टे की नीति को मंजूरी मिल चुकी है और अभिरुचि पत्र तैयार किया जा रहा है जो जल्द जारी हो सकता है।’
अभिरुचि पत्र से पहले रोडशो का आयोजन अमूमन नहीं होता है क्योंकि संभावित बोलीदाताओं से अभिरुचि पत्र जारी करने के बाद बातचीत की जाती है। लेकिन यह कदम सौदे को लेकर केंद्र की गंभीरता को दिखाता है। उक्त अधिकारी ने कहा कि कॉनकॉर का निजीकरण इसी साल करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
हालांकि अभिरुचि पत्र अभी तक जारी नहीं हुआ है, ऐसे में यह देखना होगा कि 31 मार्च, 2023 तक सौदा पूरा हो पाता है या नहीं। कॉनकॉर के विनिवेश को नवंबर 2019 में मंजूरी मिली थी लेकिन निजी क्षेत्र के लिए 30.8 फीसदी हिस्सेदारी की पेशकश की गई थी। सरकार के पास कंपनी में 54.8 फीसदी हिस्सेदारी है। 42,389 करोड़ रुपये के मौजूदा बाजार पंजीकरण के हिसाब से 30.8 फीसदी हिस्सेदारी का मूल्य करीब 13,056 करोड़ रुपये है।
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से 65,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि इस साल अभी तक शेयरों की बिक्री, आरंभिक सार्वजनिक निर्गम और शेयर पुनर्खरीद से 24,543.7 करोड़ रुपये ही जुटाए गए हैं। इनमें से 20,516 करोड़ रुपये भारतीय जीवन बीमा निगम के आईपीओ से मिले थे। आईडीबीआई में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया भी इस साल पूरी होने की उम्मीद है। सरकार आईडीबीआई में 15 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 13,900 करोड़ रुपये जुटा सकती है।