एफपीआई को लाभांश कर राहत देने से परहेज कर सकती हैं कंपनियां

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 8:51 AM IST

भले ही बजट प्रस्तावों ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को लाभांश भुगतान पर कम दर का लाभ उठाने की अनुमति दी है, लेकिन कंपनियां घरेलू कर दरों पर विदहोल्ड कर को बरकरार रख सकती हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि कर संधि के लाभ और कम दर पर कर कटौती चाहने वाली कंपनियों को गुणात्मक कारकों की समीक्षा करनी होगी। उन्हें इस पर विचार करना होगा कि क्या एफपीआई कर के लिए जिम्मेदार है और क्या वह लाभांश आय का लाभार्थी मालिक है।
पिछले समय में ऐसे मामले सामने आए जिनमें भारतीय कर अधिकारियों ने फैसला दिया कि इकाई लाभांश आय की लाभार्थी मालिक नहीं है। इसके अलावा इसे लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं कि कर अधिकारी कर की कम कटौती के लिए कंपनियों पर ब्याज या जुर्माना लगा सकते हैं।
एफपीआई मामलों से अवगत एक अधिकारी ने कहा, ‘कंपनी के पास उसके शेयरों में निवेश करने वाले सैकड़ों एफपीआई हो सकते हैं। क्या कंपनियां कर रेजिडेंसी सर्टिफिकेट पर बहुत ज्यादा निर्भर करेंगी? या क्या वे एफपीआई से इसकी पुष्टि के लिए अतिरिक्त प्रमाण लेंगी कि वे कम कर संधि दरों के लिए योग्य हैं?’
बजट में एफपीआई के लिए लाभांश पर टीडीएस को तर्कसंगत बनाकर इसे संधि दरों के अनुरूप बनाया गया है, जो 5-15 प्रतिशत हो सकती हैं, यह अब तक कंपनियों द्वारा लागू 20 प्रतिशत कर दर से कम है।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियों को कम दरों पर विदहोल्डिंग करों को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि बजट में इस संबंध में किए गए संशोधन का मकसद करदाताओं को कर संधि दरों पर अमल करने में सक्षम बनाना है।
नांगिया एंडरसन में पार्टनर सुनील गिडवानी ने कहा, ‘मौजूदा समय में, एफपीआई या अन्य निवेशकों या ऋणदाताओं को ब्याज चुकाने वाली कंपनियां टीआरसी जैसे दस्तावेजों और एफपीआई के कर सलाहकार की सलाह के आधार पर स्थिति और संधि निवास के बारे में स्वयं को संतुष्ट करती हैं। लाभांश के लिए भी इस पर अमल किया जा सकता है।’
उन्होंने कहा कि गैर-मॉरिशस स्थित एफपीआई को चुकाए जाने वाले लाभांश को लेकर कम आशंकित रह सकती हैं।

First Published : February 2, 2021 | 11:47 PM IST