स्वतंत्र निदेशकों की सुरक्षा पर सीआईआई का जोर

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 7:03 AM IST

कंपनी कानून के प्रावधानों को फौजदारी अपराध की श्रेणी से अलग किए जाने के बाद उद्योग प्रतिनिधियों ने स्वतंत्र निदेशक पद की सुरक्षा पर जोर दिया है। उनका कहना है कि स्वतंत्र निदेशकों के व्यक्तिगत दायित्व के लिए स्पष्ट तौर पर कानूनी एवं प्रक्रियात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है ताकि उन्हें बेवजह मुकदमेबाजी के जोखिम से बचाया जा सके।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने स्वतंत्र निदेशकों के लिए स्पष्ट तौर पर सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किए जाने पर जोर देते हुए कहा है, ‘मुकदमे की शुरुआत अपने आप में नियम के बजाय अपवाद होना चाहिए। स्वतंत्र निदेशकों के खिलाफ मुकदमा केवल उसी सूरत में शुरू किया जा सकता है जब प्रथम दृष्टया मामले में उनकी संलिप्ता का सबूत हो।’
सीआईआई ने कहा, ‘गलत करने वालों पर मुकदमा अवश्य चलाया जाना चाहिए। लेकिन जो व्यक्ति वास्तव में प्रबंधन के लिए जिम्मेदार नहीं हैं उनके खिलाफ मुकदमेबाजी के जोखिम को कम करने के लिए कानून में मुकदमेबाजी और सुरक्षा संबंधी स्पष्ट दिशानिर्देशों को शामिल करने की आवश्यकता है।’
उद्योग संगठन ने कहा कि स्वतंत्र निदेशकों की बढ़ती जवाबदेही वास्तव में चिंता की बात है क्योंकि इससे स्वतंत्र निदेशकों के बीच इस्तीफे की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। ऐसे में बोर्ड स्तर के पदों के लिए प्रतिभाशाली स्वतंत्र निदेशकों की उपलब्धता कम हो सकती है।
सीआईआई की ओर से सरकार को यह सुझाव कंपनी कानून के उन प्रावधानों के संदर्भ में दिया गया है जिनके तहत गैर-अनुपालन के मामलों में न केवल कंपनी को बल्कि ‘चूक करने वाले अधिकारी’ अथवा निर्दिष्ट अधिकारी को भी दंडित करने की बात कही गई है।
सीआईआई ने सुझाव दिया है कि कंपनी द्वारा किए गए अपराध के लिए किसी भी प्रतिनिधिक दायित्व से स्वतंत्र निदेशकों को बाहर रखने के लिए कंपनी कानून में उपयुक्त प्रावधान को शामिल किया जा सकता है। सीआईआई ने कहा कि स्वतंत्र निदेशकों नागरिक कर्तव्यों को फौजदारी श्रेणी से अलग रखने का उद्देश्य स्वतंत्र निदेशकों के रूप में संस्थान में भरोसे को बचाए रखना है। ऐसे में यदि उन्हें कुछ सुरक्षा उपलब्ध कराया जाता है तो स्वतंत्र निदेशक के तौर पर कंपनी से जुडऩे वाली प्रतिभाशाली व्यक्तियों की चिंताओं को दूर करने में काफी मदद मिलेगी। उद्योग संगठन ने कहा, ‘स्वतंत्र निदेशकों को स्पष्ट तौर पर प्रतिनिधिक आपराधित दायित्व से अलग रखने की आवश्यकता है क्योंकि वे कंपनी के दैनिक कामकाज में शामिल नहीं होते हैं।’
सीआईआई ने कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में कहा कि इस प्रकार के असाधारण समय में लिए गए दमदार निर्णय के भले ही अपेक्षित परिणाम न मिला हो लेकिन उन्हें दीर्घकालिक लाभ के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती है। उदाहरण के लिए, अनिश्चित वाह्य परिदृश्य और अस्तित्व बचाए रखने पर ध्यान केंद्रित किए जाने के बीच निदेशकों को कंपनी के हित और अन्य तमाम हितधारकों के हितों के बीच सही संतुलन बिठाना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

First Published : March 14, 2021 | 11:03 PM IST