भारत और यूरोपीय संघ ने अपने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत बाजार पहुंच को बाधित करने वाले नियामकीय उपायों से निपटने के वास्ते एक समर्पित ढांचा स्थापित करने के लिए सहमति जताई है। यह अपने प्रकार का पहला ढांचा होगा जो दोनों देशों के बीच व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करेगा।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि यह ढांचा भारत को उन नियामकीय चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा जो यूरोपीय संघ द्वारा लागू किया गया है अथवा भविष्य में लागू किया जा सकता है। इस प्रकार यह एफटीए के तहत मिलने वाले फायदों की रक्षा करेगा। यह भारत को कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) जैसे यूरोपीय संघ के कानूनों से निपटने में भी मदद कर सकता है।
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों ने ‘रैपिड रिस्पॉन्स मैकेनिज्म’ के तहत एक समर्पित तंत्र स्थापित करने पर सहमति जताई है जो व्यापार की राह में बाधा पैदा करने वाले मौजूदा एवं भविष्य के कानूनों के बारे में चिंताओं को दूर करेगा।
उन्होंने कहा, ‘हमारे पास एक उच्चाधिकार प्राप्त रैपिड रिस्पॉन्स मैकेनिज्म होगा जो दोनों पक्षों के बीच मुद्दे को तुरंत चर्चा के लिए लाएगा। अगर मामले का समाधान अधिकारियों के स्तर पर नहीं होता है उसे आगे बढ़ाने के लिए भी व्यवस्था है। मंत्री इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दखल दे सकते हैं। यह एक नई बात है जिस पर भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहमति बनी है।’
इसी प्रकार नॉन-वॉयलेशन कम्प्लेंट्स (एनवी) नए उपायों का समाधान तलाशने में मदद करेगा। अधिकारी ने बताया कि अगर मुक्त व्यापार समझौते के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन किए बिना कोई नया कानून या नियम पेश किया जाता है तो भी वह समझौते के तहत उपलब्ध बाजार पहुंच को बाधित नहीं कर सकता है। एनवी ऐसे मुद्दों को निपटाने में मदद करेगा।