राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील पंचाट (एनसीएलएटी) ने भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (सीसीआई) के आदेश को चुनौती देने वाली दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन डॉट कॉम की याचिका आज खारिज कर दी। सीसीआई ने नियामकीय मंजूरी हासिल करने के दौरान जानकारी छिपाने की बात करते हुए फ्यूचर समूह के साथ एमेजॉन का 2019 का सौदा खारिज कर दिया था। इस सौदे में एमेजॉन ने 1,431 करोड़ रुपये का निवेश कर किशोर बियाणी की अगुआई वाली फ्यूचर कूपन्स प्राइवेट लिमिटेड (एफसीपीएल) में 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी।
पंचाट ने सीसीआई के इस फैसले को बरकरार रखा है कि एमेजॉन ने गलतबयानी कर और तथ्यों को छिपाकर प्रतिस्पर्द्धा नियामक को जताने की कोशिश की थी कि यह गठजोड़ और उसके उद्देश्य एफसीपीएल के कारोबार में एमेजॉन के हित में हैं।
पंचाट ने 300 पृष्ठ के अपने फैसले में कहा कि इस सौदे का वास्तविक उद्देश्य भारतीय खुदरा क्षेत्र में कदम रखने के लिए फ्यूचर समूह के साथ रणनीतिक करार करना था। पंचाट ने पाया कि एमेजॉन ने एफआरएल के संबंध में सीमित खुलासे किए। ये खुलासे केवल एफसीपीएल के पास रखे एफआरएल के इक्विटी वॉरंट से संबंधित थे। इसने असली बात नहीं बताई, जो एफआरएल के रणनीतिक अधिकार एवं हित हासिल करना और खुद एवं एफआरएल के बीच ‘वाणिज्यिक गठजोड़’ करना थी।
इसने सीसीआई के दिसंबर के आदेश का हवाला देते हए कहा, ‘यह अपील पंचाट सीसीआई के रुख से पूरी तरह सहमत है।’ एनसीएलएटी ने सीसीआई द्वारा दिसंबर के आदेश में लगाए गए 200 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा है। इसने कहा ऐसा सभी पक्षों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। एमेजॉन को फॉर्म-2 (व्यापक ब्योरे) दाखिल करने और 45 दिन के भीतर जुर्माना भरने का निर्देश दिया गया है।
एनसीएलएटी का तर्क है कि यह जुर्माना उचित और न्यायसंगत है। उल्लेखनीय है कि सीसीआई के जुर्माने में सूचनाएं छिपाने के लिए 1 करोड़ रुपये और जिम्मेदारियों के संदर्भ में गठजोड़ की अधिसूचना जारी करने में नाकाम रहने के लिए 200 करोड़ रुपये का जुर्माना शामिल है। सूत्रों ने कहा कि एमेजॉन की कानूनी टीम एनसीएलएटी के आदेश की समीक्षा कर रही है और वह इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे सकती है। एमेजॉन की की विधिक रणनीति के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा, ‘सीसीआई को दी गई जानकारी में यह साफ उल्लेख किया गया था कि कंपनी का फ्यूचर कूपन्स में निवेश रणनीतिक निवेश है क्योंकि सरकार किसी भी समय देश में मल्टी-ब्रांड रिटेल क्षेत्र में निवेश को मंजूरी दे सकती है। ‘ सूत्रों के मुताबिक एमेजॉन की कानूनी टीम 300 पृष्ठ के आदेश की समीक्षा कर रही है। वह दावा कर सकती है कि एमेजॉन ने सीसीआई को सभी जानकारी लिखित में उपलब्ध कराई थीं। लेकिन अब सीसीआई दावा कर रहा है कि इसे स्पष्ट रूप से एफआरएल का उल्लेख करना चाहिए था। सूत्रों ने एमेजॉन के अलग-अलग रूप में अलग-अलग जानकारी देने के बारे में कहा कि एमेजॉन ने दस्तावेज इस तरह से पेश नहीं किए कि सीसीआई के लिए किसी सूचना को समझना या दबाना मुश्किल हो जाए। यही दस्तावेज मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र के साथ भी साझा किया गया था और उन्होंने यह साफ तौर पर समझा था कि एमेजॉन का निवेश फ्यूचर कूपन्स के जरिये फ्यूचर रिटेल में होने जा रहा था। एमेजॉन सौदे को मंजूरी के 12 महीने बाद खारिज करने का सीसीआई को अधिकार नहीं होने का दावा कर सकती है।