नॉर्वे के केंद्रीय बैंक, Norges Bank ने बुधवार को घोषणा की कि वह ईथिकल (नैतिक) कारणों से तीन कंपनियों को अपने सरकारी पेंशन फंड से बाहर निकाल रहा है। ये कंपनियां हैं भारत की अदाणी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ), अमेरिका की एल3हैरिस टेक्नोलॉजीज और चीन की वीचई पावर।
इस फंड को चिंता है कि युद्ध या अशांति के दौरान अदाणी पोर्ट्स लोगों के अधिकारों का उल्लंघन कर सकती है। दूसरे शब्दों में कहें तो, फंड को अदाणी पोर्ट्स के काम करने के तरीके पर शंका है, जिसके कारण उन्हें इस फंड से बाहर रखा गया है।
नॉर्वे के बैंक ने यह भी कहा, “कंपनी को मार्च 2022 से निगरानी में रखा गया था, लेकिन बहिष्करण के फैसले (exclusion decision) को देखते हुए अब वह निगरानी समाप्त हो गई है।” अदाणी पोर्ट्स भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट पोर्ट ऑपरेटर और 13 बंदरगाहों और टर्मिनलों के साथ एक एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर है, जो देश की बंदरगाह क्षमता का 24 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। नॉर्वे के बैंक का निर्णय 21 नवंबर, 2023 को नैतिकता परिषद की सिफारिश पर आधारित है।
L3Harris और Weichai पावर को किया बाहर
नॉर्वे के सरकारी पेंशन फंड ने दो कंपनियों, Weichai पावर और एल3हैरिस को भी बाहर निकाल दिया है। Weichai पावर को इस शंका के चलते हटाया गया है कि कहीं वो अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़कर हथियार बेचने में मदद तो नहीं कर रहा। वहीं एल3हैरिस को हटाने का कारण है परमाणु हथियारों के लिए उपकरण बनाने का उसका काम। नॉर्वेस बैंक ने ये नहीं बताया कि इन कंपनियों के फंड में कितने शेयर थे।
नॉर्वे का सरकारी ग्लोबल पेंशन फंड
नॉर्वे की सरकार ने भविष्य के लिये बचत करने और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत रखने के लिए ग्लोबल पेंशन फंड की स्थापना की थी। यह फंड नॉर्वे को उत्तरी सागर में 1969 में मिले तेल से कमाए गए पैसे को संभालता है। इस फंड को इसलिए बनाया गया था ताकि तेल से होने वाली कमाई को समझदारी से खर्च किया जा सके और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर ना पड़े।
साल 1990 में इस फंड को बनाने के लिए कानून बनाया गया और 1996 में पहली बार इसमें पैसा जमा किया गया। दुनिया के सबसे बड़े सरकारी धन रखने वाले फंडों में से एक होने के नाते, यह फंड नॉर्वे की अर्थव्यवस्था के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सिर्फ विदेशों में ही निवेश करता है। इस फंड के पास दुनिया भर की करीब 9,000 कंपनियों के शेयर हैं, जो दुनियाभर में सभी listed कंपनियों के लगभग डेढ़ प्रतिशत शेयरों के बराबर है।