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Explainer: सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के तहत सैलरी-पेंशन पर मांगे गए सुझाव, आपके लिए इसमें क्या है?

यह प्रक्रिया MyGov प्लेटफॉर्म पर चल रही है, जहां एक सवालों का सेट तैयार किया गया है। लोग आसानी से सैलरी-पेंशन को लेकर यहां अपनी राय रख सकते हैं

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ऋषभ राज   
Last Updated- February 09, 2026 | 7:27 PM IST

केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए वेतन आयोग सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं होता, बल्कि उम्मीदों और भविष्य की प्लानिंग से जुड़ा मामला होता है। इसी कड़ी में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर अब माहौल बनना शुरू हो गया है। सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिससे पहली बार कर्मचारियों को यह महसूस हो रहा है कि उनकी राय भी सीधे सुनी जा रही है।

अब वेतन, पेंशन और भत्तों पर फैसले सिर्फ फाइलों और बैठकों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि आम कर्मचारी और पेंशनभोगी भी अपनी बात रख सकेंगे। यह पहल इसलिए खास है क्योंकि इससे पहले ज्यादातर सुझाव यूनियनों या विभागों के जरिए ही पहुंचते थे। इस बार नियम ज्यादा खुली, पारदर्शी और भागीदारी वाला लग रहा है। ऐसे समय में जब महंगाई, खर्च और आय को लेकर चिंता बढ़ रही है, यह मौका कर्मचारियों के लिए बेहद अहम है। आने वाले सालों में सैलरी और पेंशन का ढांचा कैसा होगा, उसकी बुनियाद यहीं से पड़नी शुरू हो रही है।

यह प्रक्रिया MyGov प्लेटफॉर्म पर चल रही है, जहां एक सवालों का सेट तैयार किया गया है। लोग आसानी से अपना जवाब दे सकते हैं। आयोग ने साफ कहा है कि सिर्फ इसी ऑनलाइन तरीके से ही राय ली जाएगी। ईमेल, PDF या चिट्ठी से भेजी गई चीजें मान्य नहीं होंगी।

कहां और कैसे दें अपनी राय

राय देने के लिए सबसे पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in पर जाना होगा। वहां आपको MyGov से जुड़ा लिंक मिलेगा, जहां प्रश्नावली (Questionnaire) दी गई है। यह फॉर्म हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग आसानी से इसमें हिस्सा ले सकें। आयोग ने यह भी साफ किया है कि आपकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और जो भी जानकारी मिलेगी, उसे सिर्फ सामूहिक रूप में ही देखा जाएगा।

यह पहल इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि पहले वेतन आयोगों में सुझाव आमतौर पर विभागों या यूनियनों के जरिए ही पहुंचते थे। इस बार कर्मचारी और पेंशनभोगी सीधे अपनी बात रख पा रहे हैं। इससे वेतन से जुड़े फैसले ज्यादा विस्तृत होंगे और लोगों की असली जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

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सबमिट करने की आखिरी तारीख

जल्दी करना जरूरी है, क्योंकि राय देने का वक्त सीमित है। अपनी बात रखने की आखिरी तारीख 16 मार्च 2026 तय की गई है। इसके बाद पोर्टल बंद कर दिया जाएगा और कोई नया फॉर्म लिया नहीं जाएगा। इसलिए अगर आप केंद्रीय कर्मचारी हैं, पेंशनभोगी हैं या इस मुद्दे से किसी भी तरह जुड़े हैं, तो देर किए बिना फॉर्म भर देना बेहतर होगा।

जहां तक हिस्सा लेने की बात है, आयोग ने दायरा काफी बड़ा रखा है। इसमें केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी, जज और कोर्ट स्टाफ, रेगुलेटरी बॉडीज से जुड़े लोग, कर्मचारी यूनियन या एसोसिएशन, पेंशनभोगी, रिसर्चर, प्रोफेसर और दूसरे इच्छुक लोग शामिल हैं। यानी कुल मिलाकर, जो भी 8वें वेतन आयोग से प्रभावित होता है, वह अपनी राय रख सकता है।

क्या सवाल घूम रहे हैं?

8वें वेतन आयोग की जो नई प्रश्नावली सामने आई है, उसमें सरकार और कर्मचारियों से कुछ बड़े और अहम मुद्दों पर राय मांगी जा रही है। कोशिश यह समझने की है कि देश की आर्थिक हालत, बढ़ती महंगाई और सरकारी खर्च के बीच सही संतुलन कैसे बनाया जाए।

इसमें यह भी पूछा गया है कि फिटमेंट फैक्टर आखिर किन आधारों पर तय होना चाहिए और सैलरी बढ़ाने में उसकी असली भूमिका क्या होगी। साथ ही सालाना इंक्रीमेंट किस तरीके से तय किया जाए, इस पर भी सुझाव मांगे गए हैं।

इसके अलावा, वरिष्ठ अफसरों की सैलरी तय करने के लिए कौन-सा बेंचमार्क सही रहेगा, इस पर भी लोगों से राय ली जा रही है। सैलरी के साथ-साथ पेंशन और भत्तों में संभावित बदलावों को लेकर भी सवाल शामिल हैं।

वहीं कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या पिछली बार की तरह इस बार भी जनवरी 2026 से एरियर्स मिलेंगे या नहीं। आम तौर पर नया वेतन आयोग जिस तारीख से लागू होता है, उसी दिन से बकाया मिलने की उम्मीद रहती है, और इस बार भी कर्मचारियों की नजर इसी पर टिकी हुई है।

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आयोग कब बना और उसके बाद क्या-क्या हुआ?

8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा जनवरी 2025 में शुरू हुई थी। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने 3 नवंबर 2025 को इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया और आयोग के नियम व शर्तों को मंजूरी दी। आयोग को सैलरी, पेंशन और भत्तों पर अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का वक्त मिला है। दिल्ली में इसके लिए ऑफिस की व्यवस्था भी कर दी गई है।

अब जब आयोग की वेबसाइट लाइव हो चुकी है और राय लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, तो कर्मचारी संगठनों में बेचैनी बढ़ गई है। कई यूनियनों का कहना है कि अगर सरकार ने समय पर आगे का रोडमैप साफ नहीं किया या लागू करने में देरी हुई, तो वे विरोध या हड़ताल का रास्ता अपना सकते हैं। उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई ने आमदनी की असली ताकत कम कर दी है।

कुल मिलाकर यह दौर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए काफी अहम है। वेबसाइट और सवालों का यह सिलसिला सिर्फ दिखावा नहीं है, बल्कि इससे तय होगा कि आने वाले सालों में उनकी सैलरी और पेंशन का ढांचा कैसा होगा।

First Published : February 9, 2026 | 7:27 PM IST