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निवेशकों ने एक महीने में गोल्ड में डाल दिए 24 हजार करोड़ रुपये

जनवरी 2026 में निवेशकों ने शेयर बाजार की जगह सोने को चुना, गोल्ड ETF में आया रिकॉर्ड निवेश

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पुनीत वाधवा   
Last Updated- February 10, 2026 | 2:16 PM IST

जनवरी 2026 में निवेशकों का मूड साफ तौर पर बदला हुआ नजर आया। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और दुनिया भर में बढ़ते तनाव के बीच लोगों ने सुरक्षित निवेश की तलाश शुरू कर दी। इसी वजह से निवेशकों ने बड़ी संख्या में गोल्ड ETF में पैसा लगाया। म्युचुअल फंड संस्था AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में गोल्ड ETF में करीब 24 हजार करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ। यह दिसंबर 2025 के मुकाबले लगभग दोगुना है।

शेयरों से ज्यादा पैसा गया गोल्ड ETF में

इस बार हैरानी की बात यह रही कि गोल्ड ETF में आया निवेश शेयर आधारित म्युचुअल फंड से भी ज्यादा रहा। जनवरी में इक्विटी फंड्स में करीब 24,028 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि गोल्ड ETF में इससे थोड़ा ज्यादा ( 24,039.96 करोड़ रुपये) पैसा आया। इसका साफ मतलब है कि निवेशक अभी मुनाफे से ज्यादा सुरक्षा को अहमियत दे रहे हैं।

दूसरे निवेश विकल्पों में भी जबरदस्त पैसा

गोल्ड ETF के साथ-साथ इंडेक्स फंड, दूसरे ETF और विदेशों में निवेश करने वाले फंड्स में भी जमकर पैसा आया। AMFI के मुताबिक, जनवरी 2026 में इन सभी को मिलाकर करीब 39,955 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। यह दिखाता है कि लोग अब सिर्फ शेयर बाजार पर निर्भर नहीं रहना चाहते।

क्यों बढ़ा सोने की तरफ झुकाव

जानकारों का कहना है कि निवेशकों में डर और अनिश्चितता बढ़ी है। दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे तनाव और बाजार की कमजोरी के कारण लोग सुरक्षित निवेश ढूंढ रहे हैं। सोना हमेशा से मुश्किल समय में भरोसेमंद माना जाता रहा है, इसलिए गोल्ड ETF की मांग तेजी से बढ़ी है।

आदित्य बिड़ला सन लाइफ AMC के सीईओ ए. बालासुब्रमण्यम का कहना है कि सोने और चांदी की कीमतें बढ़ने से गोल्ड ETF में निवेश बढ़ा है। लेकिन उनका मानना है कि लंबे समय में पैसा बनाने के लिए शेयर बाजार अब भी सबसे बेहतर विकल्प है।

महंगे सोने में निवेश खतरा भी हो सकता है

OmniScience Capital के सीईओ विकास गुप्ता का कहना है कि निवेशकों ने बड़ी कंपनियों के शेयरों में बहुत कम पैसा लगाया। इसी वजह से वे उन बड़े शेयरों में छुपे अच्छे मौके का फायदा नहीं उठा पाए, जिनकी कीमतें अभी सही नहीं हैं। उनका कहना है कि कई निवेशक महंगे दाम पर भी गोल्ड ETF में लगातार पैसा डालते रहे, जो लंबे समय में नुकसान का कारण बन सकता है।

हालांकि, उन्हें यह देखकर अच्छा लगा कि शेयर बाजार में लगाया गया बड़ा हिस्सा फ्लेक्सी-कैप फंड्स में गया। इससे फंड मैनेजरों को यह आजादी मिलती है कि वे जहां मौके दिखें, वहां निवेश कर सकें, चाहे वह बड़ी कंपनियां हों या दूसरे सेक्टर। गुप्ता ने यह भी कहा कि मल्टी-एसेट फंड्स में फ्लेक्सी-कैप फंड्स से ज्यादा पैसा आना यह दिखाता है कि निवेशक उस समय ज्यादा सतर्क हो जाते हैं, जब शेयर बाजार में सबसे अच्छे मौके होते हैं।

First Published : February 10, 2026 | 2:11 PM IST