प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
एडलवाइस फाइनेंशियल सर्विसेज ने मंगलवार को एक बड़ा ऐलान किया। कंपनी ने कहा कि प्राइवेट इक्विटी फर्म कार्लाइल अब उनकी हाउसिंग फाइनेंस वाली कंपनी निडो होम फाइनेंस में बहुमत की हिस्सेदारी लेने जा रही है। इसके लिए कार्लाइल 2100 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
इस डील में कार्लाइल एशिया पार्टनर्स से जुड़े फंड्स पहले एडलवाइस से निडो की 45 फीसदी हिस्सेदारी सेकंडरी तरीके से खरीदेंगे। साथ ही कंपनी में 1500 करोड़ रुपये की नई इक्विटी भी डालेंगे। कुल मिलाकर निवेश 2100 करोड़ का होगा।
निडो होम फाइनेंस 2010 में शुरू हुई थी। ये अफोर्डेबल और मध्यम वर्ग के घरों के लिए लोन देती है। दिसंबर 2025 तक कंपनी के पास मैनेजमेंट के तहत एसेट्स 4804 करोड़ रुपये पहुंच गए थे। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 21 फीसदी ज्यादा है।
एडलवाइस के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रशेश शाह ने कहा कि कार्लाइल का यह निवेश निडो के लिए बहुत अहम कदम है। इससे एक मजबूत और लंबे समय तक साथ देने वाला पार्टनर मिल रहा है। भारत में हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। लोग घर आसानी से खरीद पा रहे हैं और बैंकिंग क्रेडिट तक पहुंच बढ़ रही है। ऐसे में निडो अच्छा प्रदर्शन कर सकती है।
कार्लाइल के पार्टनर सुनील कौल, जो एशिया में फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर देखते हैं, ने कहा कि हाउसिंग भारत के लिए बहुत जरूरी है। इस इंडस्ट्री में काफी ग्रोथ की संभावना है। कार्लाइल को फाइनेंशियल सर्विसेज और खासकर हाउसिंग फाइनेंस में अच्छा अनुभव है। वे निडो को और बड़ा बनाने में मदद करेंगे, खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में अफोर्डेबल घरों की जरूरत पूरी करने में।
यह सौदा अभी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, नेशनल हाउसिंग बैंक और कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। बता दें कि पिछले साल कार्लाइल ने पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस में अपनी पूरी 10.44 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी थी।
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एडलवाइस फाइनेंशियल सर्विसेज ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही यानी Q3FY26 के नतीजे भी जारी किए। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 112 फीसदी बढ़कर 264 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह सिर्फ 124.37 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से होने वाली कमाई भी 132.1 फीसदी उछलकर 4404.43 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। पिछले साल यह 1897.67 करोड़ रुपये थी।
हाउसिंग फाइनेंस सेगमेंट में इस तिमाही लोन देने का आंकड़ा 559 करोड़ रुपये रहा, जो साल भर पहले से 36 फीसदी ज्यादा है। कंपनी का कहना है कि एसेट क्वालिटी स्थिर बनी हुई है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स 2.53 फीसदी और नेट एनपीए 2.09 फीसदी है। कलेक्शन एफिशिएंसी भी 98.2 फीसदी के साथ मजबूत बना रहा।