केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि अगले 500 दिनों के दौरान करीब 25,000 टावर लगाने के लिए 26,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। यह रकम दूरसंचार विभाग (डीओटी) के यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ) से खर्च की जाएगी।
नए कोष की मंजूरी के बारे में घोषणा 1 से 3 अक्टूबर तक आयोजित हुए आईटी मंत्रियों के सम्मेलन में की गई थी। इस सम्मेलन का आयोजन यहां इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दौरान किया गया था।
केंद्रीय संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि देश के हरेक कोने में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए कोष आवंटित किया गया था।
सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है, ‘मंत्री ने ‘पीएम गति शक्ति’ की दिशा में तेजी लाने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बधाई दी। उन्होंने यह भी बताया कि पूंजीगत खर्च के लिए राज्यों को 2,000 करोड़ रुपये की विशेष सहायता दी गई है। उन्होंने राज्यों को अपने प्रदेशों में व्यवसाय आकर्षित करने के लिए सक्रियता बढ़ाने और व्यवसाय अनुकूल नीतियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।’
गति शक्ति केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई 100 लाख करोड़ रुपये की परियोजना है, जिसमें मुख्य रूप से रेल और सड़क मार्ग शामिल हैं। सरकार ने टेलीग्राफ ऐक्ट में संशोधन करने के बाद दिसंबर 2003 में यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ) बनाया था।
इसका मकसद ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में दूरसंचार सेवाएं मुहैया कराना था, क्योंकि वहां कम राजस्व और वाणिज्यिक गतिविधि के अभाव की वजह से इन इलाकों में सेवा मुहैया कराने के लिए बाजार व्यवस्था का अभाव था। अब इस कोष का इस्तेमाल पूरे देश में टावर नेटवर्क के तेज इंस्टॉलेशन के लिए किया जाएगा।
तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के सचिव अल्केश कुमार शर्मा ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी नीतियों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुरूप संशोधित करने का सुझाव दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जन-केंद्रित और व्यवसाय-केंद्रित सेवाओं में सुधार के लिए केंद्र सरकार की नई पहलों का लाभ उठाना चाहिए, जिससे कि वहां रहन-सहन और व्यवसाय करना सुगम हो सके।
चर्चा आईटी नियमों में नए घटनाक्रम, डेटा गवर्नेंस, डिजिटल इंडिया भाषिनी, डिजिटल पेमेंट, माईस्कीम, और मेरी पहचान पहलों से जुड़ी रही।
आईटी मंत्रियों ने ऑनलाइन गेमिंग, पोर्नोग्राफी, और संस्थानों पर सोशल मीडिया के प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। केंद्रीय मंत्री ने राज्य मंत्रियों के सूमह को इन चिंताओं को लेकर कई और चर्चाएं आयोजित करने का भी आश्वासन दिया। मंत्रियों ने ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए नियमित आधार पर बैठकें करने का भी निर्णय लिया है।