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पैदावार में गिरावट की आशंका से हल्दी का रंग चटख, पांच महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंची कीमत

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Last Updated- May 17, 2023 | 12:02 AM IST
Turmeric price hike

पिछले दिनों हुई बारिश से महाराष्ट्र में हल्दी की फसल खराब होने की खबरों ने बाजार में हल्दी का रंग चटख कर दिया है। पैदावार में गिरावट की आशंका से पिछले 20 दिनों में हल्दी करीब 12 फीसदी महंगी हो गई है। वायदा बाजार की कीमतें पिछले पांच महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। बाजार में सटोरियों की सक्रियता बता रही है कि हल्दी में अभी और तेजी देखने को मिलेगी।

हल्दी की कीमतों में लगातार चौथे सप्ताह उछाल देखने को मिल रहा है। हल्दी के दाम करीब पांच महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। हल्दी का मई वायदा में कीमतें बढ़कर 8350 रुपये, जून वायदा 8570 रुपये और अगस्त वायदा 8758 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई। वायदा बाजार की तरह हाजिर बाजार में भी कीमतें तेजी से भाग रही है। हाजिर बाजार निजामाबाद में हल्दी के दाम बढ़कर 7460 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गए जबकि 20 दिन पहले 26 अप्रैल 2023 को यहां हल्दी के दाम 6672 रुपये प्रति क्विंटल बोले जा रहे थे।

हल्दी के दामों में अचानक आई तेजी की वजह पिछले दिनों हुई बारिश के कारण फसल खराब होने की खबरों के बाद से बाजार में सटोरियों की सक्रियता को माना जा रहा है। एसएमसी कमोडिटी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर आपूर्ति में कमी के कारण हल्दी (जून) वायदा की कीमतें पिछले पांच महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। महाराष्ट्र में फसल खराब होने की रिपोर्ट के कारण आवक में तेजी से गिरावट हुई, जिससे कीमतों को समर्थन मिला। आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण हल्दी में बढ़त जारी रहने की संभावना है। लेकिन तेलंगाना और महाराष्ट्र में भी आपूर्ति में सुधार हुआ क्योंकि बेहतर कीमतों के कारण किसानों ने अपना स्टॉक जारी कर रहे हैं। कीमतों में बढ़ोत्तरी के बाद निर्यात मांग भी कम हुई है।

गौरतलब है कि पिछले महीने बारिश के कारण महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में फसल को कभी नुकसान हुआ जिसके कारण पैदावार में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर हुई बेमौसम बारिश से हल्दी की फसल को नुकसान हुआ है। बारिश के कारण गुंटूर, कृष्णा और एनटीआर जिलों में हल्दी का स्टॉक बारिश के पानी में भीग गया था। हालांकि नई फसल की आवक में सुधार हुआ है। निजामाबाद में अब तक लगभग 7-8 लाख बोरी और सांगली में लगभग 7 लाख बोरी की आवक हो चुकी है।

हल्दी कारोबारियों की मानी जाए तो इस समय बाजार में स्टॉक की कोई कमी नहीं है क्योंकि कीमतें ज्यादा होने के कारण किसान और छोटे कारोबारी अपना माल निकालने में लगे हुए हैं। स्टॉकिस्ट कीमतों में हर वृद्धि के साथ अपने स्टॉक को जारी करने की कोशिश कर रहे हैं। मसाला बोर्ड ने देश में इस वर्ष हल्दी का उत्पादन 13.3 लाख टन होने का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल की अपेक्षा 18.4 फीसदी अधिक है।

अप्रैल-फरवरी 2023 के दौरान हल्दी का निर्यात 10.42 फीसदी बढ़कर 151,298.89 टन हो गया, जबकि अप्रैल-फरवरी 2022 के दौरान 137,017.23 टन का निर्यात हुआ था। फरवरी 2023 में लगभग 14,806.30 टन हल्दी का निर्यात किया गया, जबकि फरवरी 2022 में 10,358.22 टन हल्दी का निर्यात किया गया था, जो 42.94 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है। जनवरी 2023 में 12,484.25 टन का निर्यात किया गया था, जो 18.60 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है।

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First Published - May 16, 2023 | 11:58 PM IST

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