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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में है निवेश की भरपूर संभावनाएं

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Last Updated- December 10, 2022 | 1:25 AM IST

आर्थिक मंदी की वजह से कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में निवेश पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। इस सेक्टर में अगले 2-3 सालों में 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश को आकर्षित किए जाने की उम्मीदें बन रही हैं।
पिछले साल अक्टूबर में 11वीं योजना के अंतर्गत संशोधित मेगा फूड पार्क स्कीम (एमएफपीएस) की घोषणा होने के बाद से ही खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय को 42 अभिरुचि पत्र (इओआई) मिले।
मंत्रालय ने मेगा फूड पार्क को 50 करोड़ रुपये सब्सिडी देने की घोषणा की थी। खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के अवर सचिव एस. के. मोहंती ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हमलोगों को 42 अभिरुचि पत्र मिले हैं जिसमें से 10 को दिसंबर महीने में स्वीकृति दे दी गई थी।’
10 मेगा फूड पार्क के लिए केवल सरकार के द्वारा ही 500 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। मोहंती का कहना है, ‘जिन प्रस्तावों को स्वीकार किया गया है वे 100-500 करोड़ रुपये तक के दायरे में हैं।’
मोहंती को उम्मीद है कि 10 मेगा फूड पार्क स्कीम के लिए विस्तृत परियोजना रिर्पोट(डीपीआर) अगले 15 दिनों में ही जमा किया जाएगा। एमएफपीएस के मुताबिक अगर डीपीआर को स्वीकृति मिलती है तो इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा नहीं तो इसे रद्द कर दिया जाएगा।
टेक्नोपैक के उपाध्यक्ष (खाद्य और कृषि) संजय सेठ का कहना है, ‘अगर हम हरएक फूड पार्क में औसतन 200 करोड़ रुपये निवेश करते हैं और उसमें सरकार की सब्सिडी 500 करोड़ रुपये को जोड़ दें तो पहले चरण में 10 फूड पार्क को न्यूनतम 1500 करोड़ रुपये का निवेश मिलेगा। इस तरह अगले 2-3 सालों में इस सेक्टर के 30 एमएफपीएस में सामूहिक निवेश 5000 करोड़ रुपये हो सकता है।’
कुछ कंपनियों और लोगों ने भी एमएफपीएस में पहले चरण में निवेश करने की योजना बनाई है। मसलन बाबा रामदेव, पुणे की छोड़िया फूड प्रोडक्ट, कर्नाटक के यागाची गु्रप और पंजाब के स्टर्लिंग एग्रो भी निवेश करने के लिए ख्वाहिश मंद हैं।
मोहंती का कहना है, ‘हर एक  एमएफ पीएस के पास न्यूनतम पांच कंपनियां होंगी जिनमें से कम से कम एक खाद्य प्रसंस्करण कंपनी होनी चाहिए।’

छोड़िया फूड पार्क के निदेशक प्रदीप छोड़िया भी चार साझीदार कंपनियों के साथ मिलकर शिरवाल में एक एमएफपीएस में कोल्ड स्टोरेज और खाद्य प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे के लिए 120-130 करोड़ का निवेश करने की सोच रहे हैं।
प्रदीप का कहना है कि खाद्य और पेय पदार्थ उद्योगों में मंदी का कोई असर नहीं दिख रहा है और उनमें विकास भी हो रहा है। छोड़िया को उम्मीद है कि ब्रांडेड उत्पादों के उत्पादन के लिए ब्रांडेड एफएंडबी मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां भी मेगा फूड पार्क में 350 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करेंगी।
इसके अलावा बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी भारत में नए उभरते बाजारों में अपने विस्तार के लिए मौका तलाशना चाहती हैं। इंटरनेशनल फूड, ड्रिंक्स ऐंड हॉस्पीटैलिटी एक्जीबिशन (आईएफई) के मुताबिक फूड और बेवरेज सेक्टर वर्ष 2008 में 110 बिलियन डॉलर रहा और यह सालाना 9 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है।
सेठ का कहना है, ‘फूड पार्क जूस प्लांट, चिप्स, ब्रेकफास्ट सीरियल्स, चाय और इससे जुड़े क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित कर रहे हैं।’

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First Published - February 17, 2009 | 10:36 PM IST

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