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भारत की आर्थिक रफ्तार पर बड़ा अनुमान, वृद्धि दर घटने की आशंका क्यों बढ़ी?

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कम बारिश, ऊर्जा संबंधी चुनौतियों और वैश्विक सुस्ती के बीच देश की आर्थिक वृद्धि में कमी आने का अनुमान जताया गया है

Last Updated- June 25, 2026 | 8:38 AM IST
GDP

ऊर्जा की कमी और सामान्य से कम मॉनसून को देखते हुए एसऐंडपी ग्लोबल ने चालू वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया है। भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2025-26 में 7.7 प्रतिशत और 2024-25 में 7.1 प्रतिशत रही थी।

एसऐंडपी ने बुधवार को एक रिपोर्ट में कहा, ‘ऊर्जा की कमी, औसत से कम मॉनसून का अनुमान और वैश्विक वृद्धि में सुस्ती के बीच हमारा अनुमान है कि मार्च, 2027 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत रह जाएगी। वित्त वर्ष 2025-26 में यह 7.7 प्रतिशत थी।’

अमेरिका और ईरान द्वारा पिछले सप्ताह अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद कच्चे तेल की कीमत कम हुई है, लेकिन ऊर्जा को लेकर तनाव का असर अर्थव्यवस्था पर तब तक बने रहने की आशंका है, जब तक कि ऊर्जा से जुड़ा क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा ठीक होकर पश्चिम एशिया में सामान्य स्थिति नहीं बरकरार हो जाती है। बहरहाल मौसम विभाग ने 2026 में सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाते हुए कहा है कि अल नीनो के कारण मॉनसूनी बारिश दीर्घावधि औसत का 90 प्रतिशत रहेगी।

एसऐंडपी का वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वृद्धि का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के 6.6 प्रतिशत के अनुमान के अनुरूप है। रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर सुधरकर 7.2 प्रतिशत हो जाएगी और उसके बाद के वित्त वर्ष में 7 प्रतिशत रहेगी। तेल की खुदरा कीमत में वृद्धि के बाद ऊर्जा के दबाव के कारण खुदरा महंगाई में वृद्धि होने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हमारा अनुमान है कि खुदरा महंगाई इस वित्त वर्ष में बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो जाएगी, क्योंकि विनिर्माता ऊर्जा की बढ़ी कीमत का बोझ ग्राहकों पर डालेंगे।’

वित्त वर्ष 2026 में भारत में खुदरा महंगाई करीब 2 प्रतिशत रही है। महंगाई बढ़ने की संभावना के कारण भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति में सख्ती के कदम उठा सकता है। एसऐंडपी ग्लोबल ने उम्मीद जताई है कि केंद्रीय बैंक चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में नीतिगत रीपो रेट में 25 आधार अंक की वृद्धि करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हम उम्मीद करते हैं कि इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में रीपो रेट में वृद्धि होगी।’ एजेंसी को उम्मीद है कि अगले दो वित्त वर्षों में नीतिगत रीपो रेट 5.5 प्रतिशत बनी रहेगी और वित्त वर्ष 2030 में ही घटकर 5.25 प्रतिशत पर आने की संभावना है।

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First Published - June 25, 2026 | 8:38 AM IST

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