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परमाणु संयंत्रों के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट, सुरक्षा और निवेश दोनों पर फोकस

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नियमों में यह प्रावधान है कि केंद्र हर पांच साल में विशेषज्ञों का समूह  बनाएगा, यह परमाणु क्षति के लिए ऑपरेटर के नागरिक दायित्व की अधिकतम सीमा की समीक्षा करेगा

Last Updated- August 17, 2026 | 10:19 PM IST
nuclear plant
प्रतीकात्मक तस्वीर

परमाणु ऊर्जा विभाग के परमाणु ऊर्जा के टिकाऊ उपयोग और विकास (शांति) अधिनियम के घोषित नियमों का प्रारूप ‘बहुत अच्छी तरह से तैयार किया गया है’ और इसके कई प्रावधान ‘आगे की ओर एक सही कदम’ हैं। यह स्वतंत्र विशेषज्ञों की राय है।

इन नियमों के तहत परमाणु संयंत्र ऑपरेटर्स के लिए परमाणु क्षति से जुड़े नागरिक दायित्व को कवर करने के लिए बीमा पॉलिसी, वित्तीय सुरक्षा या दोनों का एकसाथ बनाए रखना ज़रूरी है। ऐसी वित्तीय सुरक्षा तब तक बनी रहनी चाहिए जब तक कि संबंधित स्टोरेज पूल से सारा इस्तेमाल हो चुका फ्यूल  हटा न दिया जाए। इसके अलावा विदेशी डिजाइन वाले परमाणु संयत्र या रिएक्टर को उसके मूल देश के विनियमन निकाय से प्रमाणित या मंजूर किया जाना चाहिए। साथ ही, यह प्रावधान भी है कि वह मूल देश या किसी अन्य विदेशी देश में चालू हालत में होना चाहिए।

नियमों में यह प्रावधान है कि केंद्र हर पांच साल में विशेषज्ञों का समूह  बनाएगा। यह परमाणु क्षति के लिए ऑपरेटर के नागरिक दायित्व की अधिकतम सीमा की समीक्षा करेगा। डेलॉयट इंडिया के साझेदार  अनुजेश द्विवेदी ने कहा, ‘तकनीक और साइट को फाइनल करने से पहले प्री-लाइसेंसिंग कंसल्टेशन और इन-प्रिंसिपल मंजूरी से जुड़े प्रावधान इच्छुक निवेशकों से संभावित लाइसेंस आवेदनों की प्रोसेसिंग के लिए अच्छी तरह से तैयार मैकेनिज्म प्रदान करेंगे।’ उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक मंजूरी से निवेशकों को कोई भी बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता करने से पहले उचित स्पष्टता मिलेगी।

परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का आवेदन मिलने पर, लाइसेंसिंग अथॉरिटी आवेदक के कॉरपोरेट स्वरूप और गवर्निंग बोर्ड के संबंध में उनकी साख का शुरुआती मूल्यांकन करेगी। यह विनियमन नियमों के पालन के प्रति आवेदक की समझ और जिम्मेदारियों का भी मूल्यांकन करेगी। इसमें साइट का चयन, लाइफ-टाइम डिजाइन सपोर्ट, रेडियोएक्टिव वेस्ट प्रबंधन, इस्तेमाल हो चुके फ्यूल का स्टोरेज और आधारभूत ढांचे शामिल हैं।

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First Published - August 17, 2026 | 10:12 PM IST

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