वाणिज्य मंत्रालय ने वेस्ट शिपमेंट रेग्युलेशन (डब्ल्यूएसआर) को लेकर भारतीय उद्योग की चिंता दूर करने के लिए यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ सरकार के स्तर पर बातचीत का प्रस्ताव दिया है। यह नियम 2027 से लागू होने वाला है।
आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक मंत्रालय ने उन कानूनों की जांच की है, जिनकी वजह भारत में आयातित मेटल स्क्रैप की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जो भारत के घरेलू विनिर्माण में प्रमुख कच्चा माल है। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने उन दस्तावेजों को देखा है।
वाणिज्य विभाग ने 8 जून के एक कार्यालय ज्ञापन में एफटी (यूरोप-1) डिवीजन को सूचित किया कि डब्ल्यूएसआर की वजह से यूरोपीय संघ से भारत सहित गैर-ओईसीडी देशों को स्क्रैप के निर्यात पर प्रतिबंध लग सकता है। इस कानून के तहत रिसाइकिल किए जाने योग्य सामग्री को यूरोपीय संघ ब्लॉक के भीतर ही रखने की कवायद की जा रही है।
ज्ञापन में कहा गया है, ‘यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे विकसित देशों से उच्च-गुणवत्ता वाले स्क्रैप के आयात पर भारत बहुत अधिक निर्भर है। ऐसे प्रतिबंध से भारतीय उद्योगों की गुणवत्तायुक्त द्वितीयक कच्चे माल की पहुंच पर विपरीत असर पड़ सकता है।’
मंत्रालय ने पाया कि इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईईपीसी इंडिया) ने इस मामले को यूरोपीय अधिकारियों के साथ उठाने का समर्थन किया है, ताकि उच्च गुणवत्ता वाले स्क्रैप तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित की जा सके। समाचार प्रकाशित होने के लिए भेजे जाने तक इस सिलसिले में वाणिज्य मंत्रालय से मांगी गई जानकारी का जवाब नहीं मिल सका।
मटेरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमआरएआई) ने इस सिलसिले में सरकार से अपनी चिंताएं जताते हुए ज्ञापन दिया था, उसके बाद सरकार ने कदम उठाए। एमआरएआई का तर्क था कि इस नियम के तहत भारत के रिकाइक्लिंग उद्योग को यूरोपीय संघ से रिसाइक्लिंग करने योग्य सामग्री पाने के लिए कठोर जांच से गुजरना होगा, जिससे उनके अनुपालन और परिचालन लागत में बढ़ोतरी होगी।
संगठन ने इसे लेकर नीतिगत हस्तक्षेप का अनुरोध किया, जिसमें एल्युमीनियम स्क्रैप पर 2.5 प्रतिशत आयात शुल्क हटाना, धातु स्क्रैप पर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करना, प्रस्तावित एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी’ (ईपीआर) दायित्वों से आयातित गैर लौह स्क्रैप को बाहर रखना और अनिवार्य ‘प्री-शिपमेंट इंस्पेक्शन सर्टिफिकेशन’ (पीएसआईसी) प्रणाली को हटाना शामिल है।