अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 71.73 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 68.43 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। दोनों की कीमतें पिछले कई महीनों के निचले स्तर के करीब पहुंच गई हैं।
तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह OPEC+ का फैसला है। संगठन ने अगले महीने से रोजाना 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त तेल उत्पादन बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस उत्पादन बढ़ोतरी में सऊदी अरब और रूस सबसे आगे रहेंगे। यानी आने वाले दिनों में बाजार में पहले से ज्यादा कच्चा तेल पहुंचेगा।
OPEC के आंकड़ों के मुताबिक, मई में समूह का कुल उत्पादन 3.313 करोड़ बैरल प्रतिदिन रहा। इसके बाद जून में उत्पादन में धीरे-धीरे सुधार शुरू हुआ है। अब अगस्त से उत्पादन लक्ष्य बढ़ने के बाद बाजार में तेल की सप्लाई और बढ़ने की उम्मीद है।
कुछ समय पहले पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी। लेकिन अब हालात पहले से बेहतर हैं। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस ले जाने वाले जहाज फिर सामान्य तरीके से गुजर रहे हैं। इससे सप्लाई रुकने का खतरा काफी कम हो गया है।
सऊदी अरब का तेल निर्यात अब लगभग संघर्ष से पहले वाले स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी अपने तेल की सप्लाई सामान्य कर दी है। इससे दुनिया भर में कच्चे तेल की उपलब्धता और बढ़ने की उम्मीद है।
निवेशकों को अब डर है कि अगर बाजार में तेल की सप्लाई लगातार बढ़ती रही और मांग उसी रफ्तार से नहीं बढ़ी, तो जरूरत से ज्यादा तेल उपलब्ध हो सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है और फिलहाल इनमें तेजी के आसार कम नजर आ रहे हैं।