Copper Demand: देश में इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के तेजी से विस्तार के बीच भारत को बढ़ती तांबे की मांग को पूरा करने के लिए हर पांच साल में करीब पांच लाख टन अतिरिक्त रिफाइंड तांबा उत्पादन क्षमता विकसित करने की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय तांबा संघ भारत (ICA India) के मैनेजिंग डायरेक्टर मयूर करमारकर ने रविवार को यह बात कही।
उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में तांबे की मांग देश की आर्थिक वृद्धि के अनुरूप बढ़ने की संभावना है। एसोसिएशन का अनुमान है कि साल 2026 में तांबे की मांग में लगभग 9 फीसदी की वृद्धि होगी। सप्लाई की स्थिति पर उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान कॉपर के द्वितीयक स्मेल्टर के दोबारा शुरू होने तथा हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के नए द्वितीयक स्मेल्टर के चालू होने से देश की उत्पादन क्षमता में करीब एक लाख टन की बढ़ोतरी होगी। हालांकि, यह देश की मौजूदा लगभग 18 लाख टन की कुल मांग के मुकाबले काफी कम है।
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करमारकर ने कहा कि इससे कुछ हद तक राहत मिलेगी, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में मांग और सप्लाई के बीच का अंतर लगातार बढ़ेगा, इसलिए रिफाइनिंग और स्मेल्टिंग सेक्टर में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।
उन्होंने बताया कि घरेलू स्तर पर तांबा कैथोड की उपलब्धता में भी सुधार होगा। हिंडालको अपनी स्मेल्टर-रिफाइनरी क्षमता का विस्तार कर रही है, जबकि कच्छ कॉपर की नई उत्पादन क्षमता भी जल्द शुरू होने वाली है। इससे देश में घरेलू प्रोसेसिंग के लिए ज्यादा मात्रा में तांबा कैथोड उपलब्ध होगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा विस्तार योजनाएं भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगी।
उनका कहना था कि यदि भारत की वृद्धि दर और तांबे की खपत का मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो हर पांच साल में करीब पांच लाख टन नई रिफाइंड तांबा क्षमता जोड़ना अनिवार्य होगा। तभी घरेलू उत्पादन बढ़ती मांग के साथ कदम मिला सकेगा।
आईसीए इंडिया के वार्षिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में देश में तांबे की मांग 9.3 फीसदी बढ़कर 18.78 लाख टन हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में यह 17.18 लाख टन थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, भवन निर्माण, स्वच्छ ऊर्जा और नई प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिए जाने से तांबे की मांग में लगातार तेजी आ रही है।
भवन निर्माण क्षेत्र में तांबे की मांग 11 फीसदी और मैन्युफैक्चरिंग में 17 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रिकॉर्ड क्षमता जोड़ी गई। इसके अलावा एयर कंडीशनर, पंखे, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन जैसी टिकाऊ उपभोक्ता सामान की मजबूत बिक्री के चलते इस क्षेत्र में भी दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे तांबे की मांग को और बल मिला।
(PTI इनपुट के साथ)