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फार्मा कंपनियों को सरकार से बड़ी राहत, अब दवा की वास्तविक ओवरचार्जिंग पर ही होगी कार्रवाई

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दवा मूल्य नियंत्रण (DPCO) नियमों में संशोधन से फार्मा कंपनियों को ओवरचार्जिंग मामलों में बड़ी राहत मिली है और नई दवाएं लॉन्च करना आसान हो गया है

Last Updated- July 04, 2026 | 10:30 AM IST
pharmaceutical
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

केंद्र सरकार ने औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (डीपीसीओ), 2013 में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। दवा उद्योग का कहना है कि इन बदलावों से नियमों का पालन करना आसान होगा, कंपनियों पर गलत तरीके से अधिक कीमत वसूलने के मामलों में बोझ कम होगा और दवा मूल्य नियंत्रण के नियम पहले से अधिक स्पष्ट हो जाएंगे। साथ ही, नियमों के पालन को और मजबूत बनाया गया है।

30 जून को सरकार द्वारा जारी नए नियमों के अनुसार, यदि सरकार द्वारा तय नई कीमत लागू होने के बाद कोई मूल्य-नियंत्रित दवा अधिक कीमत पर बेची जाती है, तो ऐसे मामलों में दवा बनाने वाली कंपनियों को पहले की तुलना में राहत मिलेगी।

संशोधित नियम के तहत, यदि कंपनी यह साबित कर देती है कि उसने नई कीमत की जानकारी सभी संबंधित लोगों तक सही तरीके से पहुंचा दी थी तब उस पर केवल उतनी ही दवाओं के लिए कार्रवाई होगी, जितनी मात्रा वास्तव में संबंधित वितरक, स्टॉकिस्ट या खुदरा विक्रेताओं ने  अधिक कीमत पर बेची है यानी अब पूरी आपूर्ति श्रृंखला की बजाय केवल वास्तविक उल्लंघन की गई मात्रा के लिए ही कंपनी जिम्मेदार होगी।

इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस (आईपीए) के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा कि नए नियमों से प्रक्रियाएं आसान हुई हैं और डीपीसीओ नियमों का पालन पहले से अधिक मजबूत होगा।

जैन ने कहा, ‘पहले कंपनियों को उन मामलों में भी कार्रवाई का सामना करना पड़ता था, जिनमें गलती आपूर्ति श्रृंखला के किसी अन्य व्यक्ति की होती थी। अब यदि कंपनी यह साबित कर दे कि उसने नई कीमत की जानकारी समय पर सभी तक पहुंचाई थी, तो उसकी जिम्मेदारी केवल उसी मात्रा तक सीमित रहेगी, जिस पर वास्तव में अधिक कीमत वसूली गई हो। इससे व्यवस्था अधिक स्पष्ट और न्यायसंगत बनेगी तथा आपूर्ति श्रृंखला के सभी लोगों की जवाबदेही तय होगी।’

हालांकि, इस राहत के साथ कंपनियों के लिए कुछ सख्त नियम भी लागू किए गए हैं। कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उन्होंने नई कीमतों की सूची सभी डीलरों और खुदरा विक्रेताओं को भेजी। कीमतों में कमी की सूचना कम से कम दो राष्ट्रीय समाचार पत्रों में प्रकाशित कराई। अपनी वेबसाइट पर नई कीमतें अद्यतन कीं। संशोधित मूल्य सूची जारी की और प्रत्येक बैच के उत्पादन और स्टॉक का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा।

सरकार ने कुछ प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए अन्य बदलाव भी किए हैं। यदि कोई दवा निर्माता ऐसी नई दवा बाजार में लाता है जिसकी खुदरा कीमत सरकार पहले ही तय कर चुकी है, और वह दवा उसी कीमत तय होने के 12 महीने के भीतर लॉन्च की जाती है, तब कंपनी को राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) से दोबारा कीमत की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। अब उसे केवल नए फॉर्म 1ए के माध्यम से दवा लॉन्च होने की जानकारी एक महीने के भीतर देनी होगी।

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First Published - July 4, 2026 | 10:30 AM IST

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