लंबे समय तक राहत देने के बाद प्याज अब कंज्यूमर के आंसू निकालने लगा है। महीने भर में प्याज के भाव तेजी से बढ़ चुके हैं। कारोबारियों के मुताबिक इसकी कीमतों में आगे और तेजी आ सकती है। मानसून में देरी के कारण प्याज की रोपाई पर भी असर पड़ रहा है। जिससे खरीफ सीजन वाली प्याज की फसल आने में देरी हो सकती है।
महाराष्ट्र के प्याज कारोबारी विजय बाफना ने कहा कि इस समय प्याज में तेजी ट्रेंड है। प्याज की निर्यात मांग निकल रही है। मानसून में देरी कारण खरीफ सीजन की फसल आने में देरी हो सकती है। ऐसे में मंडियों में प्याज के थोक भाव 35 से 40 रुपये किलो तक जा सकते हैं। मंडियों में प्याज 40 रुपये तक बिकने पर खुदरा में इसके भाव 60 रुपये किलो तक जा सकते हैं।
प्याज कारोबारी शर्मा ने कहा कि बारिश के सीजन में प्याज के दाम आमतौर पर चढ़ते ही हैं। ऐसे में आगे प्याज की कीमतों में और तेजी नजर आ रही है। प्याज की सरकारी खरीद कीमत बढ़ने से भी इसकी कीमतों में तेजी को बल मिल सकता है। नेफेड ने प्याज की खरीद कीमत 13 फीसदी बढ़ाकर 2,125 रुपये कर दी है। पहले यह कीमत 1,875 रुपये क्विंटल थी।
महाराष्ट्र स्थित प्याज की प्रमुख मंडी लासलगांव में एक माह के दौरान इसके थोक भाव 750-2,000 रुपये से बढ़कर 800-2,700 रुपये हो चुके हैं। इस दौरान दिल्ली की आजादपुर मंडी में भाव 500-1,500 रुपये से चढ़कर 750-2,000 रुपये और बेंगलूरु में 1,000-1,600 रुपये से बढ़कर 1,500-2,200 रुपये क्विंटल हो गए।
इस बीच, खुदरा बाजारों में भी प्याज महंगी हुई है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक महीने में देश भर में प्याज की औसत खुदरा मॉडल कीमत (इस भाव पर अधिकतर बिक्री होती है) 25 से बढ़कर 35 रुपये किलो हो गई। वहीं दिल्ली के खुदरा बाजारों में 25 से 30 रुपये बिकने वाली प्याज अब 40 से 45 रुपये किलो बिक रही है।
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बाफना ने बताया कि मार्च-अप्रैल में बारिश से प्याज को नुकसान हुआ था। जिससे बाजार में अच्छी गुणवत्ता की प्याज की उपलब्धता कम हो गई। इस वजह से प्याज के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। दिल्ली के प्याज कारोबारी पीएम शर्मा ने कहा कि मई तक कमजोर गुणवत्ता की प्याज ज्यादा आ रही थी। इसलिए भाव कम थे। अब अच्छी गुणवत्ता की प्याज आ रही है। जिसके दाम अधिक हैं।