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चीन ने अमेरिका को दी पटखनी! ‘लाइनशाइन’ बना दुनिया का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर

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2017 के बाद पहली बार किसी चीनी सुपरकंप्यूटर ने टॉप500 रैंकिंग में हासिल किया पहला स्थान; प्रति सेकंड 2.198 एक्साफ्लॉप्स की क्षमता से किया कमाल

Last Updated- June 24, 2026 | 11:27 AM IST
China supercomputer crown
प्रतीकात्मक फोटो

China Supercomputer Crown: चीन ने सुपरकंप्यूटिंग की वैश्विक दौड़ में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के सबसे शक्तिशाली कंप्यूटर का खिताब फिर से अपने नाम कर लिया है। साल 2017 के बाद पहली बार किसी चीनी सुपरकंप्यूटर ने प्रतिष्ठित टॉप500 रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया है।

चीन के शेनझेन स्थित ‘लाइनशाइन’ (Lineshine) सुपरकंप्यूटर ने अमेरिकी ‘एल कैपिटन’ (El Capitan) को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर बनने का गौरव हासिल किया है। मंगलवार को जारी टॉप- 500 सूची के अनुसार, चीन के राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग केंद्र में स्थापित लाइनशाइन की कंप्यूटिंग क्षमता 2.198 एक्साफ्लॉप्स है। यानी यह प्रति सेकंड दो क्विंटिलियन (10 की घात 18) से ज्यादा गणनाएं करने में सक्षम है।

अमेरिका की कैलिफोर्निया स्थित लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी का एल कैपिटन अब दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। इसके बाद टेनेसी और इलिनॉय की राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में मौजूद दो अन्य अमेरिकी सुपरकंप्यूटर तीसरे और चौथे स्थान पर हैं। वहीं जर्मनी का जुपिटर सुपरकंप्यूटर पांचवें स्थान पर खिसक गया है।

China Supercomputer: क्या है एक्सास्केल कंप्यूटर?

टॉप- 500 सूची के अनुसार, दुनिया में फिलहाल केवल पांच ऐसे सुपरकंप्यूटर हैं जिनकी क्षमता सार्वजनिक रूप से प्रमाणित की गई है और जिन्हें एक्सास्केल कंप्यूटर की श्रेणी में रखा जाता है। एक्सास्केल कंप्यूटर वह होता है जो प्रति सेकंड कम से कम एक क्विंटिलियन गणनाएं कर सकता है।

पारंपरिक CPU पर चलता है लाइनशाइन

लाइनशाइन की सबसे खास बात यह है कि यह अधिकांश आधुनिक हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटरों की तरह ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) पर निर्भर नहीं है। कृत्रिम मेधा (AI) और मशीन लर्निंग के लिए आमतौर पर GPU का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन लाइनशाइन पूरी तरह पारंपरिक सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) आधारित आर्किटेक्चर पर काम करता है।

बिजली की भारी खपत

टॉप- 500 के मुताबिक, इस सुपरकंप्यूटर को संचालित करने के लिए करीब 42.2 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है। इतनी बिजली से एक छोटे शहर की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।

दरअसल, सुपरकंप्यूटर रैंकिंग केवल तकनीकी क्षमता का संकेत नहीं होती, बल्कि यह किसी देश की वैज्ञानिक, रक्षा, AI और एडवांस कंप्यूटिंग क्षमता का भी महत्वपूर्ण पैमाना मानी जाती है। चीन का शीर्ष स्थान पर पहुंचना वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में उसकी बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

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First Published - June 24, 2026 | 11:27 AM IST

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