भारत के वाहन कलपुर्जा उद्योग को डेटा सेंटर और अक्षय ऊर्जा जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों से प्रतिभाओं और कच्चे माल को लेकर बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। यह तब है जब गाड़ियों की मांग मजबूत बनी हुई है।
एक्मा के 66वें सालाना कार्यक्रम के दौरान एक्मा और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की एक रिपोर्ट में बताया गया कि संसाधनों की यह कमी आपूर्ति श्रृंखला में पहले से मौजूद रुकावटों, श्रम की किल्लत और मांग में उतार-चढ़ाव की समस्या और बढ़ा रही है।
बीसीजी के पार्टनर एवं प्रबंध निदेशक सौरभ छाजेड़ ने कहा, ‘कई क्लस्टर में वाहन कलपुर्जा बनाने वाली कंपनियां उन उद्योगों से मुकाबला करती हैं जो खुद एक ‘सुपर साइकल’ यानी तेजी के दौर से गुजर रही हैं। इसलिए डेटा सेंटर, अक्षय ऊर्जा और इन क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले कई कच्चे माल एक जैसे हैं। कर्मियों की जरूरत भी कॉमन है। इस सबसे दबाव और बढ़ रहा है।’ कामकाज में चुनौतियों के बावजूद, मांग मजबूत बनी हुई है।