facebookmetapixel
Advertisement
Market Outlook: अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल के दाम और FIIs की खरीद-बिक्री से तय होगी शेयर बाजार की चालUpcoming IPO: IPO मार्केट में फिर लौटी रौनक! अगले हफ्ते खुलेंगे 3 बड़े मेनबोर्ड IPO, JIO-NSE भी तैयारी मेंशेयर बाजार में रौनक: टॉप-10 में से 9 कंपनियों का मार्केट कैप ₹2.15 लाख करोड़ बढ़ा, एयरटेल रही सबसे आगेहोर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा कदम: रूस से रिकॉर्ड तोड़ तेल आयात, UAE से भी जमकर खरीदारीवैश्विक तनाव के बीच आर्थिक हालातों की समीक्षा करेगी स्टैंडिंग कमेटी, RBI ने जताया है सुस्ती का अनुमान1250% का मोटा डिविडेंड! प्लास्टिक बनाने वाली कंपनी का बड़ा तोहफा, रिकॉर्ड डेट इसी हफ्तेमौसम का डबल अटैक: कहीं भारी बारिश व आंधी-तूफान का अलर्ट, तो कहीं अभी और सताएगी भीषण गर्मीसोने-चांदी की मंदी पर ‘Rich Dad, Poor Dad’ के लेखक की बड़ी सलाह: कीमत नहीं, हालात देखकर करें निवेश‘योग बना दुनिया का सबसे बड़ा सामूहिक उत्सव’, कोलकाता में बोले PM मोदी: उम्र बढ़े पर कम न हो ऊर्जाकिसानों के लिए बड़ी खुशखबरी: पीएम मोदी ने जारी की PM-Kisan की 23वीं किस्त, ऐसे चेक करें स्टेटस

जोरदार बारिश से उप्र में धान हुआ प्रभावित

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 7:45 PM IST

जोरदार बारिश के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसान अब अपने खेतों से बाढ़ का पानी घटने का इंतजार कर रहे हैं।


प्रदेश में धान का कटोरा कहे जाने वाले 12 जिलों के किसान अभी भी बाढ़ का प्रकोप झेल रहे हैं। इन जिलों में खेतों से पानी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा है। खरीफ की अच्छी बुआई से राज्य के कृषि वैज्ञानिक पहले जहां खुश थे, वहीं अब वे फसलें बचाने का नुस्खा खोज रहे हैं।

लगातार एक पखवाड़े तक हुई मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ ने गोंडा, बलरामपुर, बस्ती, सिध्दार्थनगर, संत कबीर नगर, गोरखपुर, कुशीनगर, बलिया और आजमगढ़ के खेत-खलिहानों, बांधों और जलाशयों को जलमग्न कर दिया है। बाढ़ के बाद भी किसानों को आशा है कि फसल की पैदावार जोरदार होगी।

धान की फसल ने पिछले साल भी किसानों के चेहरे पर रौनक ला दी थी। खास तौर पर उत्तर प्रदेश के पूर्वी भागों में बाढ़ के बावजूद धान की फसल अच्छी हुई थी। हालांकि इस बार किसानों को ज्यादा समर्थन मूल्य मिलने की उम्मीद थी पर केंद्र ने केवल 850 रुपये ही समर्थन मूल्य घोषित किया।

तीन साल बाद एक बार फिर इस साल जुलाई में ही राज्य के किसानों ने निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा धान की रोपाई कर ली। अच्छे मौसम को देखते हुए इस साल कृषि विभाग का अनुमान 60 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई करने का था, जबकि राज्य के किसानों ने जुलाई में ही 65 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई कर ली।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल जुलाई में धान की रोपाई का ज्यादातर काम पूरा हो गया। बुंदेलखंड में भी खरीफ की अच्छी फसल का अनुमान जताया जा रहा था। इसलिए कि इस बार बुंदेलखंड पर मानसून की बेरुखी खत्म हो गयी और यहां जमकर बारिश हुई।

बुंदेलखंड के ज्यादातर इलाकों में तो जुलाई में ही धान की आधी रोपाई हो गई। धान की पौध गलने की खबर को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने प्रभावित किसानों को फिर से पिछौती फसल की रोपाई की सलाह दी है।

Advertisement
First Published - September 3, 2008 | 11:37 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement