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आलू के वायदा कारोबार पर लगी पाबंदी से उठे कई सवाल

Last Updated- December 06, 2022 | 10:04 PM IST

आलू के उत्पादकों और व्यापारियों ने वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए हैं।


उनके अनुसार, ऐसे समय में जब घरेलू बाजार आलू से पटा पड़ा है और बंपर पैदावार के चलते कीमतें लुढ़क रही हैं तो आलू के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने का कोई मतलब नहीं है।


आगरा क्षेत्र के आलू उत्पादक और पूर्व विधायक प्रताप चौधरी ने बताया कि जब फसल की पैदावार काफी अधिक है, कीमतें स्थिर हैं और किसान फसल की प्रचुरता की समस्या से जूझ रहे हैं तब आलू के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने का क्या मतलब है। आलू के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने से विशेषज्ञों को आशंका है कि मूल्य-खोज तंत्र की अनुपस्थिति में कीमतें धराशायी हो सकती हैं।


उल्लेखनीय है कि सरकार ने बुधवार को रबर, चना, सोया तेल और आलू के वायदा कारोबार पर चार महीने के लिए प्रतिबंध लगा दिया। निठेई गांव के आलू किसान रामेश्वर दयाल ने कहा कि वायदा कारोबार पर प्रतिबंध से किसानों के लिए और समस्याएं पैदा होंगी।


उनका मानना है कि इससे कीमत को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनेगी उनका कहना है कि जब उन्हें पता चलता है कि एमसीएक्स में आलू की कीमत इस दर से चल रही है तो वे व्यापारियों से उसी दर पर बिक्री की पेशकश करते हैं। आलू के वायदा कारोबार के मामले में एमसीएक्स सबसे प्रमुख एक्सचेंज है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आलू की कीमत में गिरावट शुरू हो जाएगी और एक- दो महीनों में इसकी कीमत काफी नीचे आ जाएगी।


उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल की सरकार ने किसानों की मदद के लिए 2.50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से आलू की खरीद की है। उद्योग के एक विशेषज्ञ ने कहा कि वायदा कारोबार के कारण आलू की कीमत अब तक धराशायी नहीं हुई थी। क्योंकि वायदा कारोबार से जुड़े एक्सचेंजों में इसकी कीमत 4.50 रुपये प्रति किलो के स्तर पर रोक रखी थी।


हालांकि दिल्ली स्थित आजादपुर मंडी के आलू-प्याज मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष त्रिलोक चंद शर्मा का मानना है कि आलू के वायदा पर प्रतिबंध से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। वे कहते हैं, आलू के वायदा कारोबार करने वाले अधिकतर लोग वास्तव में इसकी डिलिवरी नहीं लेते हैं। वे सिर्फ जोखिम से बचने के लिए यहां पैसे लगाते हैं। कोल्ड स्टोरेज के मालिकों का कहना है कि इससे किसान व कारोबारी दोनों पर फर्क पड़ेगा।


कोल्ड स्टोरेज मालिक मुकेश कहते हैं, ‘आलू के किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा और इसका असर कोल्ड स्टोर की चेन पर भी पड़ेगा।’  भंडारण के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने व उत्तर प्रदेश, गुजरात, बंगाल व बिहार में इसकी बंपर पैदावार होने के कारण खुदरा बाजार में आलू की कीमत 7-10 रुपये प्रति किलो है। आलू के कुल उत्पादन का अनुमान 293.46 लाख टन लगाया गया है जबकि गत मौसम में उत्पादन 270.20 लाख टन था।

First Published - May 8, 2008 | 11:32 PM IST

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