उद्योग जगत के अधिकारियों ने कहा कि कारोबारियों द्वारा बेंचमार्क यूएस फ्यूचर्स पर भारी प्रीमियम लेने के कारण कपास का निर्यात कम होना शुरू हो गया है। स्थानीय कपड़ा मिलों की ओर से मजबूत मांग और उत्पादन कम रहने की उम्मीद के बीच ऐसा हो रहा है। विश्व के सबसे बड़े कपास उत्पादक भारत द्वारा ज्यादा प्रीमियम मांगने से बांग्लादेश, वियतनाम और चीन जैसे एशियाई खरीदार अमेरिका, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीकी देशों जैसे अन्य आपूर्तिकर्ताओं से खरीद बढ़ाने को बाध्य हो सकते हैं।
मुंबई की कोटक जिनिंग ऐंड प्रेसिंग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विनय कोटक ने कहा, ‘निर्यात अलाभकारी है। हम बहुत थोड़ा माल बांग्लादेश को बेच रहे हैं, लेकिन अन्य खरीदार नहीं खरीद रहे हैं।’ वैश्विक ट्रेडिंग फर्मों के डीलरों ने कहा कि भारत के कपास की पेशकश जनवरी और फरवरी की शिपमेंट के लिए बांग्लादेश के खरीदारों को 135 सेंट प्रति एलबी के भाव के करीब की जा रही है, जो यूएस फ्यूचर्स से करीब 20 सेंट ज्यादा है। सामान्यतया भारत यूएस फ्यूचर्स पर 5 से 10 सेंट्स/पाउंड प्रीमियम लेता है।
कोटक ने कहा कि रिकॉर्ड घरेलू कीमतें 30 सितंबर को समाप्त होने वाले 2021-22 विपणन वर्ष में निर्यात को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने अनुमान लगाया कि खरीदारों द्वारा प्रतिस्पर्धी आपूर्तिकर्ताओं का रुख करने के कारण भारत इस साल महज 40 लाख गांठ निर्यात करेगा, जबकि पिछले साल 78 लाख गांठ का निर्यात हुआ था।
डीलरों ने कहा कि भारती मिलों ने अब तक इस सीजन में 18 लाख गांठ का निर्यात किया है और जनवरी और फरवरी में 10 लाख गांठ का निर्यात और हो सकात है। एक वैश्विक ट्रेडिंग फर्म के साथ काम करने वाले मुंबई के एक डीलर ने कहा कि बांग्लादेश के कुछ खरीदार ही भारतीय कपास के लिए ज्यादा कीमत दे रहे हैं क्योंकि उन्हें तत्काल इसकी जरूरत है और वे सुनिश्चित डिलिवरी चाहते हैं। भारत से बांग्लादेश भेजा जाने वाला करीब आधा कपास भूमार्ग से जाता है, जिससे प्रतिस्पर्धी आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में शिपमेंट ज्यादा विश्वसनीय हो जाता है।
बांग्लादेश अमेरिका से भी कपास खरीदता है, लेकिन अमेरिकी कपास की फसल मार्च के बाद ही उपलब्ध हो सकेगी और समय से माल आने की कोई गारंटी नहीं है क्योंकि कोविड-19 की नई लहर के कारण मजदूरों की कमी हो गई है। भारत का कपास उत्पादन 2021-22 विपणन वर्ष में 340 लाख गांठ घट सकता है, जो एक साल पहले की तुलना में करीब 4 प्रतिशत कम है।
एक वैश्विक ट्रेडिंग फर्म से जुड़े दिल्ली के डीलर ने कहा कि कम उत्पादन का असर हाजिर बाजारों में दिख रहा है और रोजाना कारोबार की मात्रा घटकर 1,75,000 गांठ के करीब है, जबकि सामान्यतया साल के इन महीनों में 2,50,000 लाख गांठ का कारोबार होता है। डीलर ने कहा, ‘किसानों को पता है कि फसल कम है। भविष्य में दाम बढऩे के अनुमान में वे धीरे धीरे स्टॉक जारी कर रहे हैं।’ गुजरात के अहमदाबाद स्थित एक यार्न विनिर्माता ने कहा कि भारत की स्पिनिंग मिलें आक्रामक रूप से कच्ची कपास खरीद रहे हैं क्योंकि यार्न की निर्यात मांग ज्यादा है।