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फ्रिज की मार से ठंडा पड़ गया बर्फ का बाजार

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Last Updated- December 07, 2022 | 7:03 AM IST

दिल्ली में बर्फ का बाजार ठंडा हो चला है। पिछले दस सालों के दौरान 50 से अधिक फैक्टरियां बंद हो चुकी हैं तो कई बंद होने के कगार पर हैं।


आधुनिक फ्रिज व उत्पादन लागत में हुई बढ़ोतरी के कारण बर्फ के कारोबार में 60 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गयी है। बाजार में बर्फ की मांग में लगातार हो रही कमी को देखते हुए आने वाले समय में इसका बाजार नाममात्र के रह जाने की उम्मीद है। फिलहाल दिल्ली में मात्र 55-60 बर्फ फैक्टरियां हैं।

लारेंस रोड स्थित बर्फ फैक्ट्री के मैनेजर ओंकार सिंह कहते हैं, ‘1997 तक कारोबार सही था। तब उनकी फैक्ट्री में गर्मी के दौरान रोजाना 2500-2600 सिल्ली (1 सिल्ली = 58-60 किलो) का उत्पादन होता था। जो घटकर 600-700 सिल्ली पर आ गया है। उस समय झुग्गी झोपड़ी से लेकर केला गोदाम व मांस विक्रेताओं की ओर से बर्फ की जबरदस्त मांग थी।’

दिल्ली शहर बर्फ के उत्पादन के लिए मशहूर था। माना जाता है कि मुगल काल में ही उत्तरी दिल्ली के बर्फखाना की स्थापना की गयी और वहां बर्फ का उत्पादन शुरू हुआ। फिलहाल बर्फखाना स्थित फैक्ट्री में रोजाना 5000 सिल्ली की उत्पादन क्षमता है, लेकिन वहां भी अधिकतम उत्पादन 3000 सिल्ली का है। बर्फ की मांग मुख्य रूप से बूचड़खाने, केला गोदाम, आजादपुर व अन्य फल-सब्जी मंडी के साथ लिपस्टिक व बॉल पेन बनाने वाली फैक्टरियों में होती है।

25 सालों से बर्फ का काम कर रहे सिंह बताते हैं कि 12-15 साल पहले तक अकेले मोतिया खान बूचड़खाने में ही रोजाना 3000 सिल्ली से अधिक बर्फ की खपत हो जाती थी। जो अब 1500-2000 सिल्ली के  स्तर पर आ गयी है। बूचड़खानों में मांस रखने के लिए अब बड़े-बड़े आकार वाले फ्रिज आ गये हैं। जो कोराबारी अधिक लागत वाली फ्रिज नहीं खरीद सकते हैं वही बर्फ की मांग कर रहे हैं।

हालांकि शालीमार बाग स्थित केला गोदाम में बर्फ की मांग अब भी बनी  हुई है। इन दिनों वहां रोजाना 5000 सिल्ली बर्फ की खपत है। लेकिन केले के कई बड़े व्यापारियों ने एसी युक्त गोदाम बनवा लिए हैं। इससे बर्फ की मांग में गिरावट आयी है। इसके अलावा पिछले दस सालों के दौरान दिल्ली में फ्रिज की बिक्री में भारी उछाल के कारण अब निम्न स्तर के इलाकों में भी बर्फ की मांग में तेजी से कमी आयी है।

बर्फ का काम मुख्य रूप से अप्रैल से सितंबर महीने के दौरान होता है। जय आइस फैक्ट्री के मैनेजर ने बताया कि कमर्शियल बिजली की दर व मजदूरी बढ़ने के कारण उत्पादन लागत में पिछले पांच सालों के दौरान 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। हरियाणा व आसपास के इलाकों से सस्ती दरों पर होने वाली बर्फ की आपूर्ति से उनका  बाजार प्रभावित हो रहा है।

दिल्ली में एक सिल्ली की कीमत 55-60 रुपये है तो हरियाणा से आने वाली सिल्ली 40-45 रुपये में बिक रही है। सिंह कहते हैं कि बर्फ के कारोबारियों का मुनाफा इतना कम हो गया है कि हिन्दुस्तान कोल्ड स्टोरेज, माडर्न आइस फैक्ट्री, बहादुर आइस, जेएंडके आइस व भारत मिलाप जैसी फैक्टरियां बंद हो गयी। 300-600 सिल्ली की उत्पादन क्षमता वाली 25 फैक्टरियां बंद हुई हैं।

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First Published - June 23, 2008 | 11:02 PM IST

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