दुनिया के हालात बदल रहे हैं और इसका सीधा असर कमोडिटी बाजार पर दिख रहा है। टाटा म्युचुअल फंड की ताजा कमोडिटी रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाला समय सोना और चांदी के लिए चमकदार रह सकता है, जबकि कच्चा तेल और गैस में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। वहीं, तांबा और एल्यूमिनियम जैसी औद्योगिक धातुओं में भी नई तेजी की आहट सुनाई दे रही है
रिपोर्ट के मुताबिक, सोना इस समय निवेशकों का सबसे भरोसेमंद हथियार बन चुका है। बीते साल में सोने ने 50 से ज्यादा बार नया रिकॉर्ड बनाया और अब तक करीब 66% की जोरदार बढ़त दिखा चुका है। अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती, कमजोर डॉलर और दुनिया भर में बढ़ते युद्ध व राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सोने की ओर मोड़ दिया है।
खास बात यह है कि केंद्रीय बैंक भी जमकर सोना खरीद रहे हैं। साल 2022 के बाद से हर साल करीब 1000 टन सोना केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में जोड़ा है। यही वजह है कि सोना अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी रिजर्व एसेट बनता जा रहा है।
अगर किसी कमोडिटी ने सबको चौंकाया है, तो वह है चांदी। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में चांदी की कीमतों में करीब 161% की ऐतिहासिक तेजी आई है। इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल, ग्रीन एनर्जी और इंडस्ट्रियल सेक्टर से बढ़ती मांग ने चांदी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। हालांकि रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि चांदी में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव रहेगा। इसलिए निवेशकों को इसमें कदम-कदम पर सावधानी बरतने की जरूरत है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि गोल्ड-सिल्वर रेशियो एक महीने में 82 से गिरकर 58 पर आ गया है। इसका मतलब है कि चांदी अभी भी सोने के मुकाबले सस्ती नजर आ रही है। इससे ट्रेडर्स को चांदी में और मौके दिख सकते हैं, हालांकि सोना अब भी सुरक्षित निवेश के तौर पर आगे बना हुआ है।
कच्चे तेल को लेकर तस्वीर थोड़ी जटिल है। एक तरफ मिडिल ईस्ट में तनाव, अमेरिका-ईरान टकराव और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे हालात हैं, जो तेल की कीमतों को ऊपर ले जा सकते हैं। दूसरी तरफ, ओपेक प्लस देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने से बाजार में सप्लाई ज्यादा है। रिपोर्ट का कहना है कि 2026 में भी तेल बाजार में सरप्लस बना रह सकता है, यानी सप्लाई मांग से ज्यादा रहेगी। इसी वजह से तेल में बहुत बड़ी तेजी की उम्मीद फिलहाल कम है।
नेचुरल गैस को लेकर रिपोर्ट ज्यादा उत्साहित नहीं है। सर्दियों में मांग कमजोर रहने और मौसम सामान्य रहने की वजह से गैस की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। शॉर्ट टर्म में इसमें खास तेजी की उम्मीद नहीं जताई गई है।
रिपोर्ट में इशारा किया गया है कि 2026 में बेस मेटल्स की कहानी बदल सकती है। तांबा- जो इलेक्ट्रिक व्हीकल, डेटा सेंटर और पावर ग्रिड के लिए बेहद जरूरी है। उसकी सप्लाई में दिक्कतें बनी हुई हैं। चिली, पेरू और कांगो जैसी जगहों पर खदानों में रुकावट से बाजार में तंगी बढ़ी है।
एल्यूमिनियम की बात करें तो चीन उत्पादन की सीमा तक पहुंच चुका है और यूरोप अभी भी एनर्जी संकट से जूझ रहा है। ऐसे में मांग बढ़ने और सप्लाई घटने से कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में जिंक बाजार सरप्लस में रह सकता है। चीन के रियल एस्टेट सेक्टर में कमजोरी से जिंक की मांग पर असर पड़ रहा है। हालांकि, LME (लंदन मेटल एक्सचेंज) में कम स्टॉक की वजह से अचानक कीमतों में उछाल भी देखने को मिल सकता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।