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Rupee vs Dollar: रुपये में नहीं थम रही गिरावट, ₹91 के पार निकला; लगातार कमजोरी के पीछे क्या हैं वजहें?

Rupee vs Dollar: विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के मुताबिक, रुपये की मौजूदा कमजोरी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारणों के 'परफेक्ट स्टॉर्म' का नतीजा है।

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निकिता वशिष्ठ   
Last Updated- January 20, 2026 | 11:36 AM IST

Indian Rupee vs Dollar: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले 91 के अहम स्तर को पार कर गया। घरेलू करेंसी की शुरुआत 2 पैसे की गिरावट के साथ 90.93 प्रति डॉलर पर हुई। जबकि सोमवार को यह 90.90 पर बंद हुई थी।

इसके बाद रुपये पर दबाव और बढ़ा और दिन के कारोबार में यह 91.01 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक पहुंच गया। विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और वैश्विक व्यापार तनाव दोबारा बढ़ने से रुपये पर दबाव बना रहा।

रुपया सोमवार को 12 पैसे कमजोर होकर 90.90 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो अपने अब तक के रिकॉर्ड निचले बंद स्तर के करीब है। इससे पहले 16 दिसंबर 2025 को रुपया दिन के कारोबार में 91.14 के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा था और बंद होते समय 90.93 पर रहा था। विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के मुताबिक, रुपये की मौजूदा कमजोरी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारणों के ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ का नतीजा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ओर से दोबारा टैरिफ लगाने की धमकी, खासकर ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों से विवाद के कारण, वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने का माहौल बन गया है।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप टैरिफ की वैधता पर फैसला देने वाला है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा। फिलहाल बाजारों में जोखिम से बचने की सोच हावी है और सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना और चांदी खरीदी जा रही है।

इसके अलावा, पिछले कुछ महीनों से अमेरिका का श्रम बाजार मजबूत बना हुआ है। इससे डॉलर को समर्थन मिला है। बाजारों को अब उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रख सकता है।

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Indian Rupee में गिरावट की वजह ?

देश के भीतर रुपये पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली से आ रहा है। विदेशी निवेशक कई महीनों से भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं। साल 2026 में अब तक वे 29,315 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच चुके हैं। इस भारी बिकवाली के चलते रुपया एशिया की प्रमुख मुद्राओं में सबसे कमजोर में से एक बन गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि निवेशक सोना और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं।

सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक अमित पाबरी के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितता बनी रहने और रुपये के 91.07 के ऊपर टिकने की स्थिति में यह 91.70–92.00 के दायरे की ओर बढ़ सकता है, जब तक कि भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से दखल न दिया जाए। वहीं, अगर कुछ सुधार आता है तो रुपये को 90.30–90.50 के स्तर पर सहारा मिल सकता है।

First Published : January 20, 2026 | 11:28 AM IST