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मानसून की बेरुखी से बेहाल गन्ना किसान, फसल कमजोर होने की आशंका

पानी की कमी के कारण आगामी 2023-24 सीज़न के लिए गन्ने की फसल की बोआई में पहले ही देरी हो चुकी है

Last Updated- June 23, 2023 | 12:06 AM IST

महाराष्ट्र की सबसे प्रमुख फसल गन्ना मानसून की बेरुखी से बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मानसून में देरी और पानी की कमी के कारण गन्ने की फसल की बुवाई में पहले ही देरी हो चुकी है। कुछ दिनों तक बादल यूं ही रुठे रहे तो इस बार गन्ने की फसल और भी कमजोर हो जाएगी। हालांकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले दो दिनों में मानसून के सक्रिय होने की संभावना जताई है।

मानसूनी फूहारों को बेसब्री से इंतजार कर रहे मुंबई के लोगों को जल्द ही राहत मिलेगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले दो दिनों में मानसून के सक्रिय होने की संभावना जताई है। आईएमडी मुंबई के अनुसार मानसून रायगढ़, ठाणे, मुंबई और पालघर की ओर आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। मानसून के 24 जून तक मुंबई पहुंचने की संभावना है। जल्द ही पूरे राज्य में झमाझम बारिश शुरु हो जाएगी। मौसम विभाग की भविष्यवाणी से सबसे ज्यादा राहत गन्ना किसानों को हुई है क्योंकि राज्य में एक तरफ गन्ने की फसल रोपाई में देरी हो रही है तो दूसरी ओर पानी की कमी के कारण पहले की फसल सूख रही है।

गन्ना उत्पादक प्रमुख राज्य महाराष्ट्र और कर्नाटक दोनों में स्थित हर दिन विकराल होती जा रही है। पानी की कमी के कारण आगामी 2023-24 सीज़न के लिए गन्ने की फसल की बोआई में पहले ही देरी हो चुकी है। यदि कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई, तो गन्ने की फसल के लिए संभावित खतरा और बढ़ सकता है, क्योंकि जलाशयों में पानी नहीं बचा है। कमोडिटी मामलों के जानकार हेमंत कुमार के अनुसार महाराष्ट्र और कर्नाटक के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में गन्ने की फसल अपर्याप्त बारिश के कारण तनाव में है, जो सूखे जैसी स्थिति को दर्शाता है। जिससे खड़ी फसलों के लिए खतरा पैदा हो गया है। विशेष रूप से सोलापुर में 99 फीसदी वर्षा की कमी देखी गई है, जो इस मौसम में बारिश की गंभीर कमी का संकेत देता है। हेमंत के मुताबिक अगले 10 दिन महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की फसल के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं।

श्री रेणुका शुगर्स लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक वीरेंद्र सिंह ने कहा, अगले 10 दिन महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की फसल के लिए महत्वपूर्ण है। अगर तब तक बारिश नहीं होती है, तो इन क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की संभावना है। पानी की अपर्याप्त उपलब्धता के कारण किसानों को गन्ने की बुआई में देरी होती दिख रही है। कोल्हापुर के चीनी ट्रेडर अभिजीत घोरपड़े ने कहा कि, पश्चिमी महाराष्ट्र में गन्ने की स्थिति गंभीर है। अगर अगले हफ्ते बारिश नहीं हुई, तो करीब 15 फीसदी का नुकसान हो सकता है। एक बार गन्ने की फसल को नुकसान होने के बाद, रिकवर करना मुश्किल होगा। खड़ी फसल सूखने लगी है और किसानों ने इसे चारे के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

मानसून के इंतजार में किसान जानबूझकर रोपाई में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। पश्चिम महाराष्ट्र में गन्ना फसल की हालत अच्छी नहीं है। किसानों का कहना है कि अगर एक सप्ताह में बारिश नहीं हुई तो 15 फीसदी तक फसल क्षतिग्रस्त हो सकती है। एक बार यदि फसल क्षतिग्रस्त हो गई तो दोबारा उसमें सुधार आना मुश्किल होता है भले ही कितनी भी बारिश क्यों न हो। खेतों में खड़ी फसल सूखने लगी है और किसानों ने कहीं-कहीं पशु चारे के रूप में इसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू सीजन में 16 जून तक राष्ट्रीय स्तर पर गन्ना का कुल क्षेत्रफल सुधरकर 49.80 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 49.38 लाख हेक्टेयर से 42 हजार हेक्टेयर ज्यादा था।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के तीन शीर्ष उत्पादक राज्यों में शामिल है। 2022-23 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-दिसम्बर) में भी वहां गन्ना की पैदावार कम होने से चीनी के उत्पादन में भारी गिरावट आ गई। महाराष्ट्र में चीनी मिलों ने 9.98 फीसदी की औसत चीनी रिकवरी दर के साथ 1,054.75 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई करके, 2021-22 सीज़न के 137.27 लाऱ मीट्रिक टन की तुलना में 105.27 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन किया। चीनी उत्पादन में गिरावट का मुख्य कारण पिछले साल सितंबर और दिसंबर के बीच हुई बारिश को माना जा रहा है।

First Published - June 23, 2023 | 12:06 AM IST

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