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जूट की बोरियों की मांग बढ़ी, पर?उत्पादन जस का तस

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Last Updated- December 07, 2022 | 10:08 PM IST

इस साल खाद्यान्न का रेकॉर्ड उत्पादन होने की संभावना से जूट की बोरियों की मांग भले ही काफी बढ़ गई हो लेकिन पश्चिम बंगाल की जूट मिल कई समस्याओं से घिरे होने के चलते बोरियों की मांग पूरी करने में नाकाबिल साबित हो रही है।

दरअसल इन मिलों के मजदूर हड़ताल पर चले गए हैं जिससे पूरे जूट उद्योग की हालत खराब होने का अंदेशा व्यक्त किया जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा सीजन में सितंबर के पहले हफ्ते तक खरीफ का रकबा पिछले साल के 3.45 करोड़ हेक्टेयर की तुलना में 3.45 करोड़ हेक्टेयर हो गया है। इस तरह रकबे में कुल 16 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।

ऐसे में तय है कि पैकेजिंग के लिए जरूरी जूट की बोरियों की मांग बढ़ेगी। दूसरी ओर, जूट के रकबे में इस साल तकरीबन 10 फीसदी की कमी हुई है।

इस साल 7.37 लाख हेक्टेयर में जूट की खेती हो रही है जबकि पिछले साल जूट का रकबा 8.26 लाख हेक्टेयर था।

गन्नी ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष हृषिकेश श्रॉफ ने बताया कि सितंबर महीने में अकेले फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने पंजाब और हरियाणा की अनाज खरीदने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर 3 लाख बेल बी टि्वल जूट के थैले का ऑर्डर दिया है। वैसे हर महीने औसतन 1 से 1.5 लाख बेल बैग का ऑर्डर दिया जाता है।

दस साल जून से अक्टूबर की अवधि के दौरानखरीद एजेंसियों द्वारा जूट के थैलों की मांग 11 लाख बेल की थी। साल 2007-08 में सरकार ने 15.92 लाख बेल की खरीदारी की थी।

इस साल भी सरकार ने अनाज और चीनी की पैंकिंग के लिए शत-प्रतिशत जूट बैग के आरक्षण का निर्णय लिया है। श्रॉफ के अनुसार, मिलों की स्थिति मांग पूरी करने की है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी वेतन, महंगाई भत्ता और बकाया भुगतान के मुद्दों को लेकर फिर से हड़ताल पर जाने की धमकी दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि उद्योग की वर्तमान स्थिति, जहां सरकार द्वारा 11 लाख बेल का बड़ा ऑर्डर जूट मिलों को दिया है इसके फलस्वरुप कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है और जूट मिल इसकी आपूर्ति के लिए कठिन प्रयास कर रहे हैं। कच्चे जूट की कीमतों में पिछले तीन महीने के दौरान 25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।


 

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First Published - September 25, 2008 | 10:10 PM IST

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