अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को बड़ी तेजी नहीं दिखी। WTI क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा, जबकि ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर के करीब बना रहा। पिछले कारोबारी सत्र में करीब 2% की गिरावट के बाद बाजार फिलहाल शांति वार्ता और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
तेल की कीमतों में पिछले सत्र की गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी रहने की खबर रही। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ने की संभावना से निवेशकों को उम्मीद है कि फिलहाल वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। इसी वजह से बाजार में घबराहट कुछ कम हुई और तेल की कीमतों में तेज उछाल नहीं आया।
हालांकि शुक्रवार को तेल की कीमतें स्थिर रहीं, लेकिन पूरे सप्ताह की बात करें तो अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड 4% से ज्यादा की बढ़त की ओर बढ़ रहा है। इसकी वजह इस सप्ताह पश्चिम एशिया में बढ़ा सैन्य तनाव रहा। अमेरिका ने लगातार दो दिनों तक ईरान के ठिकानों पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन घटनाओं ने सप्ताह के दौरान तेल बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी, जिससे कीमतों में तेजी देखने को मिली।
बाजार की चिंता उस समय फिर बढ़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम शांति समझौता अब खत्म हो चुका है। ट्रंप के मुताबिक हालिया संघर्ष के बाद यह समझौता प्रभावी नहीं रहा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है और वार्ता जारी रहेगी। इसी वजह से निवेशक अभी किसी बड़े निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहे हैं।
तेल बाजार के लिए सबसे अहम चिंता अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। हालिया तनाव के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही धीमी बनी हुई है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक रहती है तो वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है।