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कच्चे तेल में जारी है मजबूती

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Last Updated- December 07, 2022 | 8:41 AM IST

विदेशी बाजारों में कच्चे तेल की कीमत में लगातार तीसरे दिन भी बढ़त देखी गई। न्यू यॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज में अगस्त डिलिवरी के लिए कच्चे तेल की वायदा कीमत में 1.01 डॉलर यानी 0.7 फीसदी की बढ़त हुई और यह 141.22 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।


उल्लेखनीय है कि 27 जून को कच्चे तेल का अनुबंध रेकॉर्ड 142.99 डॉलर प्रति बैरल को छू गया था पर बाजार बंद होते वक्त यह फिसलकर 140.06 डॉलर तक चला गया था। पिछले हफ्ते कच्चे तेल की कीमत में 4.2 फीसदी की वृद्धि हुई थी, जबकि 28 जून को ओपेक अध्यक्ष चकीब खलील ने संभावना व्यक्त की थी कि कच्चे तेल की कीमत साल के अंत तक 170 डॉलर को छू सकती है।

इसकी वजह फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में बढ़ोतरी के इरादे को टाल देना और यह संकेत देना कि डॉलर को मजबूती देने वाले किसी भी कदम को वह नहीं उठाएगा। दूसरे विदेशी मुद्राओं की तुलना में डॉलर के कमजोर होने से कारोबारियों का अनुमान है कि कच्चे तेल में निवेशकों का रुझान आगे भी बना रहेगा, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहेगी।

अमेरिकी जिंस वायदा कारोबार आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 24 जून को खत्म हुए सप्ताह में हेजिंग फंड मैनेजरों और दूसरे बड़े सट्टोरियों ने कच्चे तेल के बढे भाव के मद्देनजर तेल सौदों के अपने ऑर्डर लगभग दोगुने कर दिए हैं। तेल का नेट लांग पोजीशन (जिंसों की खरीद और बिक्री के बीच का अंतर) लगभग 90.5 फीसदी बढ़कर 24,217 सौदों पर पहुंच गया। अभी पिछले हफ्ते ही कच्चे तेल का नेट लांग पोजीशन बीते 5 महीनों के कमजोर स्तर तक पहुंच गया था।

इस साल कच्चे तेल की कीमत में अब तक 47 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है। इसके पीछे अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना, नाइजीरिया के तेल ठिकानों पर हुआ आतंकी हमला और उत्तरी सागर में उत्पादन के असफल होने से आपूर्ति में हुई कटौती जैसे वजह शामिल हैं। जानकारों के मुताबिक, यदि आगामी 3 जुलाई को यूरोपीय केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरों में वृद्धि करता है तो डॉलर में और गिरावट आने के आसार हैं।

28 जून को न्यू यॉर्क में एक यूरो के बदले 1.5784 डॉलर मिल रहे थे जबकि 22 जून को डॉलर की कीमत जब से यूरो की शुरुआत हुई है तब से यानी 1999 के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इस दिन एक यूरो के बदले 1.6019 डॉलर मिल रहे थे।

ओपेक अध्यक्ष खलील के शब्दों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह डॉलर में आने वाली कमजोरी और यूरेनियम संवर्द्धन मसले पर इस्रराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के लिए बन रहा दबाव है। हालांकि ओपेक के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राष्ट्र ईरान ने जारी एक रिपोर्ट में बताया कि पिछले हफ्ते उसका तेल उत्पादन 42.3 लाख बैरल प्रतिदिन के रेकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। उधर सुरक्षा और कर्मचारियों के चयन के मुद्दे को लेकर अफ्रीका के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश नाइजीरिया की शेवरन कॉर्पोरेशन में 5 दिनों से चल रही हड़ताल समझौते के बाद खत्म हो गई है।

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First Published - June 30, 2008 | 10:42 PM IST

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