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आलू, प्याज व टमाटर का बढ़ेगा रकबा, मॉनसून से मिलेगी गति

दिल्ली में टमाटर के खुदरा भाव 100 रुपये किलो तक पहुंच गए और कुछ शहरों में यह इससे भी महंगा बिक रहा है। प्याज के दाम भी बढ़कर 60 रुपये किलो हो चुके हैं।

Last Updated- July 05, 2024 | 11:06 PM IST
आलू, प्याज व टमाटर का बढ़ेगा रकबा, मॉनसून से मिलेगी गति, Area of ​​potato, onion and tomato will increase, monsoon will give impetus

केंद्र सरकार ने आज कहा कि अच्छा और समय पर आया मॉनसून आलू, प्याज तथा टमाटर की फसल के लिए फायदेमंद है। अच्छे मॉनसून के कारण चालू खरीफ सीजन में इनके रकबे में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे इन तीनों के ही तेजी से बढ़े दाम से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली में टमाटर के खुदरा भाव 100 रुपये किलो तक पहुंच गए और कुछ शहरों में यह इससे भी महंगा बिक रहा है। प्याज के दाम भी बढ़कर 60 रुपये किलो हो चुके हैं। आलू के भाव भी पिछले साल से तेज हैं और यह खुदरा बाजार में 30 से 40 रुपये किलो बिक रहा है।

कृषि मंत्रालय ने चालू खरीफ सीजन में 2.72 लाख हेक्टेयर टमाटर के रकबे का लक्ष्य रखा है, जो पिछले खरीफ सीजन के रकबा 2.67 लाख हेक्टेयर से अधिक है। मुख्य टमाटर उत्पादक क्षेत्रों जैसे आंध्र प्रदेश के चित्तूर और कर्नाटक के कोलार में टमाटर की फसल अच्छी हालत में है।

कोलार में टमाटर की नई फसल अगले कुछ दिनों में बाजार में आने लगेगी। मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे टमाटर उत्पादक राज्यों में भी खरीफ सीजन में टमाटर का रकबा बढ़ा है। दिल्ली में टमाटर के थोक भाव पिछले साल की तुलना में थोड़े कम हैं। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि कुछ सप्ताह पहले दाम ज्यादा थे।

प्याज के रकबे का लक्ष्य 27 फीसदी ज्यादा

रबी सीजन 2024 में प्याज के उत्पादन में थोड़ी कमी के बावजूद घरेलू बाजार में प्याज की आपूर्ति ठीक है। सरकार ने इस साल खरीफ सीजन में 3.16 लाख हेक्टेयर प्याज के रकबा का लक्ष्य रखा है। यह पिछले खरीफ सीजन से 27 फीसदी ज्यादा है।

आधिकारिक बयान के मुताबिक प्रमुख खरीफ उत्पादक राज्य कर्नाटक में 30 फीसदी प्याज खेतों में लग चुकी है। कर्नाटक में इस खरीफ सीजन में प्याज के रकबा का लक्ष्य 1.5 लाख हेक्टेयर है।

दूसरे प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में भी प्याज बोआई का काम अच्छा चल रहा है। 2024 के रबी सीजन में 191 लाख टन प्याज का उत्पादन होने का अनुमान है, जो प्याज की घरेलू खपत 170 लाख टन को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। रबी वाले प्याज की कटाई के बाद मौसम शुष्क रहने से भी इस साल प्याज के भंडारण में कम नुकसान हुआ है।

आलू रबी सीजन की फसल है। लेकिन इसका उत्पादन कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मेघालय, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में खरीफ सीजन में भी होता है। खरीफ सीजन वाला आलू सितंबर से नवंबर के बीच बाजार में उपलब्ध होता है।

First Published - July 5, 2024 | 10:30 PM IST

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