facebookmetapixel
Advertisement
Trump-Xi Meeting: अमेरिका-चीन की बड़ी डील! ट्रंप-शी बैठक में तनाव कम करने की कोशिश, जानें 5 बड़े फैसलेदिल्ली की रेखा सरकार का बड़ा फैसला! वर्क फ्रॉम होम से लेकर ‘नो व्हीकल डे’ तक कई नए नियम लागूHUF के जरिए घर खरीदना कैसे बन सकता है टैक्स बचत का स्मार्ट तरीका, जानिए क्या हैं फायदे और जरूरी बातेंNEET में लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में? पेपर लीक के बाद चौंकाने वाले आंकड़ेTata Motors Q4 Results: मुनाफा 31% गिरा, राजस्व में बढ़त; JLR का दबाव भारीSenior Citizens के लिए खुशखबरी! FD पर मिल रहा 8.3% तक बंपर ब्याज, जानें कौन से बैंक दे रहे सबसे ज्यादा रिटर्नMutual Fund: अप्रैल में इक्विटी AUM रिकॉर्ड स्तर पर, फंड हाउसेस ने किन सेक्टर और स्टॉक्स में की खरीदारी?तेल संकट और कमजोर पर्यटन ने मॉरीशस की अर्थव्यवस्था को झकझोरा, भारत भी रहे सतर्कप्लेटिनम हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड: 20 मई से खुलेगा NFO, किसे करना चाहिए इस SIF में निवेश?Airtel को लेकर सुनील मित्तल का 10 साल का मास्टरप्लान सामने आया

मात्रा आधारित छूट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, अब कंपनियां पूरे आत्मविश्वास से कर सकेंगी मूल्य निर्धारण

Advertisement

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति प्रसन्न भालचंद्र वराले के पीठ ने अब बंद हो चुके प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण (कॉमपैट) के फैसले को बरकरार रखा।

Last Updated- May 13, 2025 | 11:13 PM IST
Supreme Court of India
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक अहम फैसले में कहा कि मात्रा आधारित छूट की पेशकश प्रतिस्पर्धा कानून 2022 के तहत भेदभावपूर्ण मूल्य निर्धारण नहीं है बशर्ते ऐसी छूट को बराबर लेनदेन के लिए अलग तरीके से लागू न किया जाए।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति प्रसन्न भालचंद्र वराले के पीठ ने अब बंद हो चुके प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण (कॉमपैट) के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने कहा, ‘कॉमपैट के आदेश को बरकरार रखा जाता है। लंबी मुकदमेबाजी के लिए कपूर ग्लास पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता है।’

मात्रा आधारित छूट को मात्रात्मक छूट अथवा थोक छूट के रूप में भी जाना जाता है। यह मूल्य निर्धारण की एक रणनीति है। इसके तहत कुल खरीद की मात्रा बढ़ने पर किसी उत्पाद या सेवा की प्रति इकाई कीमत कम हो जाती है। इस प्रकार यह बड़े ऑर्डर के लिए कम कीमत की पेशकश के जरिये ग्राहकों को अधिक खरीदने के लिए प्रोत्साहित करती है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिस्पर्धा कानून और बाजार परिस्थितियों पर इसका काफी प्रभाव पड़ेगा।

पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन ने कहा, ‘इस निर्णय से कंपनियां ऐसा मूल्य निर्धारण मॉडल तैयार करने के लिए प्रेरित होंगे जो भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की जांच के जोखिम के बिना थोक खरीदारों को लाभ पहुंचाएगा। यह फार्मास्युटिकल्स, एफएमसीजी और औद्योगिक आपूर्ति जैसे उद्योगों के लिए काफी मायने रखता है जहां मात्रात्मक छूट आम बात है।’

सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला 2014 में दायर की गई अपील याचिका के संदर्भ में आया है। कांच की शीशियां बनाने वाली कंपनी कपूर ग्लास ने यह कहते हुए शिकायत की थी कि न्यूट्रल बोरोसिलिकेट ग्लास ट्यूबों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता भेदभावपूर्ण मूल्य निर्धारण में शामिल है। उसने आरोप लगाया था कि आपूर्तिकर्ता ने अपनी संयुक्त उद्यम इकाई को तरजीही छूट दी जो बाजार के अन्य खरीदारों के लिए नुकसानदेह है।

आयोग ने आपूर्तिकर्ता शॉट ग्लास को प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत बाजार में अपने वर्चस्व का दुरुपयोग करने का दोषी पाया और उस पर 5.66 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाते हुए परिचालन बंद करने का आदेश दिया। शॉट ग्लास ने आयोग के इस फैसले के खिलाफ कॉमपैट में अपील दायर की। कॉमपैट ने आयोग के आदेश को यह कहते हुए पलट दिया कि अगर मात्रा आधारित छूट को लेनदेन में समान स्थिति वाले खरीदारों पर अलग तरीके से लागू न किया जाए तो उसे भेदभावपूर्ण नहीं माना जा सकता है।

कॉमपैट ने कपूर ग्लास पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था, जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय ने बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है।

लॉ फर्म एकॉर्ड ज्यूरिस के मैनेजिंग पार्टनर अलय रजवी ने कहा, ‘अब कंपनियां थोक छूट, स्तरीय मूल्य निर्धारण और लॉयल्टी योजना जैसे प्रोत्साह को पूरे आत्मविश्वास के साथ उपयोग कर सकती हैं, बशर्ते वे निष्पक्ष हों और समान स्थिति वाले खरीदारों के लिए सुलभ हों।’ जैन ने कहा कि यह फैसला प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच के दायरे को मजबूत करेगा जिससे उपभोक्ताओं को फायदा हो सकता है।

Advertisement
First Published - May 13, 2025 | 10:57 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement