वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच दिसंबर में भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 1.8 प्रतिशत बढ़कर 38.51 अरब डॉलर हो गया है। वहीं वाणिज्य विभाग की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक आयात 8.8 प्रतिशत बढ़कर 63.55 अरब डॉलर हो गया है।
आयात में तेज बढ़ोतरी के कारण व्यापार घाटा बढ़कर 25 अरब डॉलर हो गया है, जो दिसंबर 2024 में 20.63 अरब डॉलर था। दिसंबर में अमेरिका को होने वाला निर्यात 1.8 प्रतिशत घटकर 6.89 अरब डॉलर रह गया है। हालांकि अप्रैल से दिसंबर के बीच कुल मिलाकर अमेरिका को होने वाला निर्यात 65.78 अरब डॉलर रहा है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 9.7 प्रतिशत ज्यादा है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि जहां तक अमेरिका को होने वाले निर्यात का सवाल है, 50 प्रतिशत शुल्क के दायरे में 55 प्रतिशत निर्यात आने के बावजूद भारत ने प्रदर्शन बेहतर रखा है। अग्रवाल ने गुरुवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, ‘इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात एक प्रमुख वजह रही, जो अमेरिका के अतिरिक्त शुल्क के दायरे में नहींआता है। हम उम्मीद करते हैं कि आगे चलकर निर्यात धनात्मक क्षेत्र में बना रहेगा।’
हालांकि उन्होंने उल्लेख किया कि आगे चलकर 50 प्रतिशत शुल्क पर नजर रखने की जरूरत होगी क्योंकि इसका दबाव टेक्सटाइल, चमड़ा जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा। सरकार कुछ सप्ताह बाद आने वाले क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर रखेगी।
उन्होंने कहा, ‘उच्च शुल्क का निश्चित रूप से अमेरिका की आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव रहेगा। आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों को कम करने के लिए हमें ज्यादा लचीला बनना होगा और ऐसा करने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि किसी खास भौगोलिक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जाए।’सेवाओं का निर्यात संकुचित हुआ है। खासकर ज्यादा आधार के कारण दिसंबर में इसकी वृद्धि 3.97 प्रतिशत रही और कुल निर्यात 35.5 अरब डॉलर रहा है। सेवाओं का आयात भी संकुचित होकर 2.35 प्रतिशत रहा और कुल 17.38 अरब डॉलर का आयात रहा। इसकी वजह से अधिशेष घटकर 18.12 अरब रह गया। दिसंबर में सेवाओं के व्यापार का आंकड़ा एक अनुमान है और भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े आने के बाद इसमें संशोधन होगा।
अप्रैल से दिसंबर के दौरान वस्तु और सेवाओं को मिलाकर कुल आयात 4.33 प्रतिशत बढ़कर 634 अरब डॉलर हो गया है, जबकि इस दौरान कुल आयात 4.94 प्रतिशत बढ़कर 730.84 अरब डॉलर हो गया है। इससे कुल व्यापार घाटा 96.58 अरब डॉलर रहा है। वित्त वर्ष 2026 में वस्तु एवं सेवाओं के निर्यात का आंकड़ा 850 अरब डॉलर के पार जाने की संभावना है। इसमें से वस्तु निर्यात 450 अरब डॉलर के पार जा सकता है, जो अप्रैल-दिसंबर के बीच 2.44 प्रतिशत बढ़कर 330.29 अरब डॉलर रहा है।
इक्रा में वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि दिसंबर में वस्तु व्यापार घाटा तेजी से बढ़ा है और यह 25 अरब डॉलर के अनुमान से अधिक है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष एससी राल्हन ने कहा कि भारत के शीर्ष निर्यात केंद्रों में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, नीदरलैंड्स, ब्रिटेन, जर्मनी, बांग्लादेश, सिंगापुर, सऊदी अरब और हॉन्गकॉन्ग शामिल हैं, जिससे निर्यात के विविधीकरण का पता चलता है।