Editorial: नए सीपीआई इंडेक्स से महंगाई की ज्यादा सटीक तस्वीर

नई श्रृंखला में किए गए बदलाव पारिवारिक उपभोग व्यय सर्वे 2023-24 पर आधारित हैं ताकि शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में परिवारों के बीच हाल के उपभोग रुझान को दर्शाया जा सके।

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बीएस संपादकीय   
Last Updated- February 12, 2026 | 9:26 PM IST

नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) श्रृंखला दिखाती है कि मुद्रास्फीति की दर जनवरी में बढ़कर 2.75 फीसदी हो गई। यह पुरानी श्रृंखला के मुताबिक दिसंबर में आए 1.33 फीसदी केे आंकड़े से काफी अधिक है। खाद्य मुद्रास्फीति की दर 2.13 फीसदी रही। सीपीआई के घटकों में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं। उसके आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 कर दिया गया है।

भारत जैसे तेजी से विकसित होते देश में अहम संकेतकों को समय-समय पर दुरुस्त किया जाना चाहिए ताकि वास्तविक जमीनी हालात का अंदाजा मिलता रहे। यद्यपि इस बार संशोधन कई कारणों से विलंबित हुआ है। इन वजहों में कोविड-19 महामारी भी शामिल है। गुरुवार को जारी नई सीपीआई श्रृंखला के अलावा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) इस महीने के अंत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर भी एक नई श्रृंखला जारी करेगा। ये दोनों मिलकर भारतीय अर्थव्यवस्था की एक अधिक सटीक तस्वीर प्रस्तुत करेंगी और नीति निर्माताओं सहित सभी हितधारकों को बेहतर जानकारी प्रदान करेंगी।

नई श्रृंखला में किए गए बदलाव पारिवारिक उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 पर आधारित हैं ताकि शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में परिवारों के बीच हाल के उपभोग रुझान को दर्शाया जा सके। नई श्रृंखला में कवरेज को भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया गया है और यह अधिक आधुनिक उपभोग बास्केट को प्रतिबिंबित करता है। उदाहरण के लिए, पहली बार चुनिंदा स्थानों में ऑनलाइन बाजारों से भी कीमतें दर्ज की जा रही हैं। सेवा क्षेत्र में कवरेज को पिछली श्रृंखला के 40 की तुलना में बढ़ाकर 50 मदों तक कर दिया गया है।

अखिल भारतीय स्तर पर भारित मदों की संख्या पिछली श्रृंखला के 299 की तुलना में बढ़ाकर 358 कर दी गई है। नई श्रृंखला में ऑनलाइन मीडिया और स्ट्रीमिंग सेवाओं जैसे मद भी शामिल हैं। घटक के संदर्भ में, खाद्य और पेय पदार्थों का भार पिछले श्रृंखला के 42.61 फीसदी की तुलना में घटकर 36.75 फीसदी हो गया है। खाद्य घटक में कमी से सूचकांक अपेक्षाकृत कम अस्थिर होने की उम्मीद है। सामान्यतः खाद्य घटक कोर की तुलना में कहीं अधिक अस्थिर होता है।

परिवारों को पेश आने वाले मौजूदा मुद्रास्फीति को सही तरीके से दर्शाने के अलावा नई सीपीआई श्रृंखला भारतीय रिजर्व बैंक के लिए मौद्रिक नीति संचालित करने में विशेष महत्त्व रखेगी। रिजर्व बैंक को सीपीआई मुद्रास्फीति दर को 4 फीसदी पर लक्षित करने का आदेश है जिसमें ऊपर या नीचे 2 फीसदी अंक की सहनशील सीमा है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपनी पिछली बैठक में पूरे अगले वित्तीय वर्ष के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान देने से परहेज किया था क्योंकि आधार वर्ष में निर्धारित बदलाव होने वाला था।

वर्तमान स्थिति में, नई श्रृंखला पर आधारित 2026-27 के पूरे वर्ष का अनुमान बारीकी से देखा जाएगा, लेकिन निकट भविष्य में एमपीसी के अपना रुख बदलने की संभावना नहीं है। हालांकि, नई श्रृंखला के आधार पर आने वाली तिमाहियों के लिए मुद्रास्फीति अनुमानों को ऊपर की ओर संशोधित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में, 5.25 फीसदी की नीतिगत रीपो दर वर्तमान चक्र के लिए अंतिम दर हो सकती है। इस प्रकार, फिलहाल वित्तीय बाजार सरकार के उधार और नकदी पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे, जो बाजार ब्याज दरों को प्रभावित कर रहे हैं।

अब जबकि सीपीआई के लिए आधार वर्ष लंबी प्रतीक्षा के बाद बदल दिया गया है और जीडीपी श्रृंखला में भी इसी तरह का बदलाव किया जा रहा है, एनएसओ को इस अवसर का उपयोग डेटा जारी करने के समय को भी बदलने के लिए करना चाहिए। शाम 4 बजे आंकड़े जारी करना बहुत मायने नहीं रखता। यह देखते हुए कि पूंजी बाजार को प्रभावित करने वाली घोषणाएं जैसे मौद्रिक नीति के निर्णय और केंद्रीय बजट की प्रस्तुति बाजार समय के दौरान की जाती हैं, जो कि सही है, यह आश्चर्यजनक है कि जीडीपी और मुद्रास्फीति के आंकड़े ट्रेडिंग समय के बाद जारी किए जाते हैं। वास्तव में, सुबह आंकड़े जारी करने से निवेशकों को आवश्यक होने पर समायोजन करने का अवसर मिलेगा।

First Published : February 12, 2026 | 9:13 PM IST