भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों द्वारा वित्तीय योजनाओं की गलत जानकारी देकर की जाने वाली बिक्री पर लगाम लगाने का प्रस्ताव रखा है जिसका व्यापक असर जीवन बीमा कंपनियों के विशेष कारोबार क्रेडिट लाइफ बिजनेस पर पड़ सकता है जिसमें बीमा पॉलिसी के साथ ऋण से जुड़ी योजनाएं जैसे आवास ऋण और माइक्रोफाइनैंस ऋण भी शामिल हैं।
अगर आरबीआई के नए नियम लागू होते हैं, तब बैंकों को इस तरह से ऋण के साथ बीमा पॉलिसी जोड़कर बेचने में मुश्किल हो सकती है। इससे बैंकों की ‘बैंकाश्योरेंस’आमदनी यानी बीमा पॉलिसी बेचकर होने वाली कमाई कम हो सकती है। बैंकों के लिए यह बैंकाश्योरेंस आमदनी उनकी कुल कमाई का 7 से 12 प्रतिशत होती है। पिछले कुछ सालों में बैंकों ने इस तरह बीमा पॉलिसी बेचकर अच्छी कमाई की है। पिछले 3 सालों में शीर्ष निजी, सरकारी और विदेशी बैंकों सहित, बैंकों की बैंकाश्योरेंस आमदनी में 31 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ोतरी हुई है।
जीवन बीमाकर्ताओं के क्रेडिट लाइफ बिजनेस पर इसका कितना असर होगा, यह तुरंत बताना मुश्किल है लेकिन उद्योग के अंदरूनी सूत्रों का अनुमान है कि क्रेडिट लाइफ सेगमेंट का 15-20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो सकता है। इस सप्ताह, आरबीआई ने ‘विनियमित संस्थाओं द्वारा वित्तीय उत्पादों एवं सेवाओं के विज्ञापन, विपणन एवं विक्रय’ से जुड़ा मसौदा नियमन जारी किए हैं, जिसमें यह कहा गया है कि बैंक किसी भी थर्ड-पार्टी योजनाओं की बिक्री को अपनी किसी भी योजनाओं के साथ नहीं जोड़ सकते। उद्योग के अंदरुनी सूत्रों के मुताबिक बड़े बैंक पहले से ही इन तरीकों का पालन करते हैं।
उम्मीद है कि नए नियमन उन मामलों पर अंशुक लगाएंगे जहां इन तरीकों को पूरी तरह से लागू नहीं किया जाता है। क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस एक विशेष प्रकार का जीवन बीमा है जो उधारकर्ता की ऋण चुकाने से पहले मृत्यु हो जाने की स्थिति में बकाया कर्ज चुकाने के लिए शुरू होता है। क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस तब खरीदा जाता है जब कोई व्यक्ति ऋण लेता है और पॉलिसी का मृत्यु से जुड़ा लाभ सीधे आपके ऋण बैलेंस से जुड़ा होता है।
प्रस्तावित नियम मोटे तौर पर ग्राहक-केंद्रित हैं। हालांकि, उद्योग के एक अंदरुनी सूत्र ने कहा कि इसका बैंक बीमा कारोबार पर असर पड़ सकता है और क्रेडिट लाइफ बिजनेस पर लगभग 10-20 प्रतिशत तक प्रभाव पड़ सकता है और ऋण बैंकों और बीमाकर्ताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बैंकों और ग्राहक दोनों को जोखिम से बचाता है।