भारतीय रिजर्व बैंक ने ऋण वसूली प्रक्रिया के दौरान उधारकर्ताओं के साथ उचित व्यवहार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बैंकों और उनके रिकवरी एजेंटों द्वारा जबरदस्ती किए जाने के चलन पर रोक लगाने वाले मसौदा दिशानिर्देशों का प्रस्ताव रखा है।
मसौदा नियमों में स्पष्ट तौर पर बताया गया है कि उधारकर्ताओं के लिए अपमानजनक या धमकी भरी भाषा का प्रयोग करने, बार-बार या गुमनाम कॉल करने, अनुचित संदेश भेजने, उधारकर्ताओं या उनके सहयोगियों को परेशान करने, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने, हिंसा की धमकी देने और देनदारियों की अदायगी न करने पर अंजाम भुगतने जैसी बातों पर रोक लगाई जाए। प्रस्तावित नियम 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी होंगे। मसौदे पर फीडबैक 4 मार्च, 2026 तक दिया जा सकता है।
मसौदा दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंकों के पास वसूली से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए एक समर्पित तंत्र होना चाहिए। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बैंकों को बकाये की वसूली के लिए अपने कर्मचारी या रिकवरी एजेंट द्वारा उधारकर्ता या गारंटर को किए गए कॉल की संख्या और समय का हिसाब रखना होगा। साथ ही बैंक को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी या रिकवरी एजेंट द्वारा किए गए कॉल की रिकॉर्डिंग हो।
आरबीआई ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि रिकवरी एजेंट केवल उधारकर्ता या गारंटर के साथ बातचीत करें और उनके रिश्तेदारों या अन्य सहयोगियों से संपर्क करने से बचें। वसूली के लिए फोन कॉल और दौरा केवल सुबह आठ बजे से शाम सात बजे के बीच ही किया जा सकता है।
केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बैंकों को सामान्य परिस्थितियों में उधारकर्ता द्वारा किसी खास समय पर संपर्क न करने के अनुरोध का सम्मान किया जाना चाहिए। एजेंटों को यह भी निर्देश दिया गया है कि पारिवारिक आपात स्थिति, विवाह, त्योहार, शोक आदि परिस्थितियों में वसूली के प्रयासों से बचना चाहिए। माइक्रोफाइनैंस ऋण के मामले में पारस्परिक सहमति के साथ निर्धारित स्थान पर ही संग्रह किया जाना चाहिए। हालांकि आरबीआई ने कहा है कि उधारकर्ता के निवास या कार्यस्थल पर जाने की अनुमति दी जाएगी बशर्ते उधारकर्ता लगातार दो या अधिक बार बताए गए स्थान पर मौजूद न रहा हो।
मसौदा नियमों के अनुसार, बातचीत के दौरान वसूली कर्मियों के लिए सभ्यता, शालीनता और मर्यादा को बनाए रखना जरूरी है। ऋणदाताओं से यह भी कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि रिकवरी एजेंट उचित प्रशिक्षण लें और ऋण वसूली एजेंट इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ बैंकिंग ऐंड फाइनैंस (आईआईबीएफ) से प्रमाण पत्र प्राप्त करें। बैंकों के पास ऋण वसूली में लगे रिकवरी एजेंटों और कर्मचारियों के लिए उचित आचार संहिता भी होनी चाहिए। बैंकों को अपने सभी चैनलों- शाखाओं, दफ्तरों या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म- पर सूचीबद्ध रिकवरी एजेंटों की एक अद्यतित सूची भी प्रदर्शित करनी होगी।
करार खत्म होने के बाद उसे सार्वजनिक करना होगा। डिफॉल्ट रकम की वसूली के लिए एजेंट को मामला सौंपते समय बैंक को लिखित नोटिस के जरिये उधारकर्ता को एजेंट का विवरण बताना होगा। वसूली प्रक्रिया के दौरान रिकवरी एजेंट के बदलने की सूरत में भी उधारकर्ता को सूचित करना होगा।
बैंक को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उधारकर्ता के बारे में जानकारी का उपयोग केवल ऋण वसूली के लिए किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी जानकारी का किसी भी तरह से दुरुपयोग न किया जा सके।
अगर किसी मामले में उधारकर्ता ने कोई शिकायत दर्ज की है तो उसका निपटरा होने तक मामले को किसी रिकवरी एजेंट को नहीं सौंपने के लिए कहा गया है। बैंकों से यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि रिकवरी एजेंट के साथ करार में कोई वसूली लक्ष्य या प्रोत्साहन शामिल करते हुए वसूली में सख्ती के लिए प्रेरित न किया जाए।