विपक्षी दलों के सदस्यों ने गुरुवार को लोक सभा में सुबह के सत्र के दौरान भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध किया। भारी हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। शाम का सत्र भी इसी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गया, क्योंकि विपक्षी सदस्यों ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
सदन की कार्यवाही सुबह के समय जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी सदस्य प्ले कार्ड दिखाते हुए नारेबाजी करने लगे। वे ‘व्यापार सौदा वापस लो’ के नारे लगाते हुए सदन के आसन में आ गए। एक प्लेकार्ड में नए श्रम कानून को वापस लेने की भी मांग की गई थी।
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर में भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें सरकार पर देश के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। ‘ट्रैप डील’ लिखे बड़े बैनर और ‘नरेंदर सरेंडर’ के पोस्टर के साथ सांसदों ने ‘देश को बेचना बंद करो’ जैसे नारे भी लगाए।
इससे पहले मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने श्रमिकों और किसानों के भविष्य से संबंधित निर्णय लेते समय उनकी आवाज को अनसुना कर दिया। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब उनकी बात सुनेंगे या वह बुरी तरह घिरे हुए हैं।
इससे पहले बुधवार को लोक सभा में बजट पर चर्चा के दौरान अपने भाषण में गांधी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हितों का अमेरिका के समक्ष ‘पूरी तरह समर्पण’ करने का आरोप लगाया और इसके लिए सरकार की आलोचना की थी।
सदन की कार्यवाही के दौरान लोक सभा में औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया गया। इसके तुरंत बाद सदन को स्थगित कर दिया गया, क्योंकि विपक्षी सदस्य भाजपा सांसद दुबे की टिप्पणियों पर हंगामा कर रहे थे। दुबे ने गुरुवार को ही मीडिया से बात करते हुए कहा था कि उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ ‘मूल प्रस्ताव’ लाने के लिए नोटिस दिया है और उनकी लोक सभा सदस्यता रद्द करने तथा उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से वंचित करने की मांग की है। मूल प्रस्ताव एक स्वतंत्र, स्व-निहित प्रस्ताव होता है जो एक विधायी सदन या विधान सभा के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाता है, जिसे निर्णय या राय व्यक्त करने के लिए तैयार किया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सोरोस फाउंडेशन यूसेड और फोर्ड फाउंडेशन के साथ हाथ मिलाकर विदेशी देशों का दौरा करते हैं और भारत विरोधी तत्वों के साथ साठगांठ करते हैं। दुबे ने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाया और आरोप लगाया कि गांधी भारत विरोधी ताकतों के साथ मिले हुए हैं।