टेक-ऑटो

मानव केंद्रित हो तकनीक, भारत को शीर्ष एआई महाशक्ति बनाने का विजन: पीएम मोदी

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत में एआई को लेकर उनका विजन तीन स्तंभों पर निर्भर है: संप्रभुता, समावेशन और नवाचार

Published by
बीएस संवाददाता   
Last Updated- February 17, 2026 | 11:06 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस यानी एआई को सर्वसुलभ बनाने की मांग की है ताकि उसके ‘लाभ’ उसे ‘जल्दी अपनाने वाले चुनिंदा’ लोगों तक ही न रहें ब​ल्कि आम जनता को भी हासिल हों। उन्होंने तकनीक को ‘मानव केंद्रित’ बनाने के भारत के प्रयासों पर भी जोर दिया।

एशियन न्यूज इंटरनैशनल (एएनआई) की टेक्स्ट सेवा को दिए एआई इंपैक्ट समिट पर केंद्रित साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत में एआई को लेकर उनका विजन तीन स्तंभों पर निर्भर है: संप्रभुता, समावेशन और नवाचार। उन्होंने कहा, ‘मेरा विजन है कि भारत को विश्व की तीन शीर्ष एआई महाशक्तियों में होना चाहिए। केवल खपत के मामले में नहीं बल्कि एआई के निर्माण के मामले में भी।’

मोदी ने कहा कि वह भारत के युवाओं की एआई से जुड़े व्यवधानों के कारण रोजगार के बाजार को लेकर उपजी चिंता को समझते हैं। उन्होंने कहा, ‘तैयारी ही डर का सबसे अच्छा इलाज है। यही कारण है कि हम एआई प्रेरित भविष्य के लिए अपने लोगों को कौशल और पुनः कौशल प्रदान करने में निवेश कर रहे हैं। मोदी ने एआई को एक फोर्स मल्टिप्लायर बताया जो हमें उन सीमाओं को आगे बढ़ाने में मदद करेगा जिन्हें हम पहले असंभव मानते थे। उन्होंने कहा, ‘इतिहास ने दिखाया है कि तकनीक के कारण काम खत्म नहीं होता। उसका स्वरूप बदलता है और नए प्रकार की नौकरियां पैदा होती हैं।

कुछ नौकरियां पुनर्परिभाषित हो सकती हैं, लेकिन डिजिटल परिवर्तन भारत की अर्थव्यवस्था में नई तकनीकी नौकरियां भी जोड़ेगा।’ ’मोदी ने कहा कि नवाचार को समावेशन के साथ जोड़कर, एआई भारत की कार्यबल को मजबूत करेगा। ‘

प्रधानमंत्री ने कहा कि समिट का विषय ‘लोग, ग्रह और प्रगति’ पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘एआई प्रणालियां दुनिया भर के समाजों द्वारा उत्पन्न ज्ञान और डेटा पर आधारित होती हैं। इसलिए, हम चाहते हैं कि एआई के लाभ सभी तक पहुंचें, न कि केवल शुरुआती उपयोगकर्ताओं तक सीमित रहें।‘

मोदी ने कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट विकासशील दुनिया में आयोजित होने वाला पहला ऐसा सम्मेलन है और ‘भारत एक ऐसा मंच बना रहा है जो कम प्रतिनिधित्व वाली आवाजों और विकास प्राथमिकताओं को सशक्त करता है।’

उन्होंने कहा, ‘एआई गवर्नेंस, समावेशी डेटासेट्स, जलवायु अनुप्रयोग, कृषि उत्पादकता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और बहुभाषी पहुंच हमारे लिए हाशिए के मुद्दे नहीं हैं। ये केंद्रीय हैं। हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है: एआई को वैश्विक विकास को तेज करना चाहिए, जबकि यह गहराई से मानव केंद्रित बना रहे।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘यह अभूतपूर्व तरीकों से मानव क्षमता का विस्तार कर सकता है, लेकिन यदि इसे बिना मार्गदर्शन के छोड़ दिया जाए तो यह मौजूदा सामाजिक बुनियाद की परीक्षा भी ले सकता है। यही कारण है कि हमने जानबूझकर इस सम्मेलन को ‘इम्पैक्ट’ के इर्द गिर्द तय किया है, ताकि परिणाम सार्थक और न्यायसंगत हों।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि सम्मेलन की मार्गदर्शक भावना है ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ (‘सबके हित के लिए, सबके सुख के लिए’) और यह रेखांकित करता है कि ‘प्रौद्योगिकी मानवता की सेवा के लिए है, उसे प्रतिस्थापित करने के लिए नहीं।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई का सचेत और रणनीतिक उपयोग गहरी विकासात्मक चुनौतियों का समाधान करने में मदद करेगा, साथ ही पूरी तरह नई आर्थिक संभावनाएं पैदा करेगा, समावेशी विकास को सक्षम करेगा, शहरी ग्रामीण विभाजन को पाटेगा और अवसरों तक पहुंच का विस्तार करेगा।

मोदी ने कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विरासत संरक्षण में एआई की भूमिका का उल्लेख किया और बताया कि कैसे डेरी सहकारी अमूल ने एआई का उपयोग करके हजारों गांवों की 36 लाख महिला डेरी किसानों को गुजराती भाषा में पशु स्वास्थ्य और उत्पादकता पर वास्तविक समय मार्गदर्शन प्रदान किया है। उन्होंने कहा, ‘जब दुनिया एआई द्वारा विभाजन गहराने की चिंता कर रही है, भारत इसका उपयोग विभाजन मिटाने के लिए कर रहा है।’

मोदी ने कहा कि एआई में पक्षपात और सीमाओं को लेकर चिंताएं आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा, ‘जैसे जैसे एआई का उपयोग बढ़ता है, वैसे वैसे जोखिम भी बढ़ते हैं। एआई प्रणालियां अनजाने में लिंग, भाषा और सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि से जुड़े पक्षपात को बनाए रख सकती हैं।’ उन्होंने इसे ‘एक ऐसा मुद्दा बताया जिसे वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है।’

एआई के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सामने विशिष्ट चुनौतियां और अवसर हैं। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता का अर्थ है कि एआई का पक्षपात ऐसे रूपों में सामने आ सकता है जो पश्चिमी संदर्भों में स्पष्ट न हों। उन्होंने कहा, ‘एक एआई प्रणाली जो मुख्य रूप से अंग्रेजी डेटा या शहरी संदर्भों पर प्रशिक्षित है, ग्रामीण उपयोगकर्ताओं या क्षेत्रीय भाषाओं के वक्ताओं के लिए खराब प्रदर्शन कर सकती है।’ लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब इसे अधिक व्यवस्थित तरीके से संबोधित करना शुरू कर रहा है।

मोदी ने कहा कि भारत में ‘हम विविध डेटा सेट बनाने पर अधिक ध्यान देख रहे हैं जो भारत की बहुलता का प्रतिनिधित्व करते हैं, क्षेत्रीय भाषाओं में एआई विकास पर अधिक जोर दिया जा रहा है, और भारतीय शैक्षणिक संस्थानों व टेक कंपनियों में निष्पक्षता और पक्षपात पर बढ़ता शोध हो रहा है।’

एआई इम्पैक्ट समिट के माध्यम से ग्लोबल साउथ की चिंताओं को आवाज़ देने की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) यात्रा विकासशील दुनिया के लिए महत्त्वपूर्ण और व्यावहारिक सबक प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि डीपीआई और एआई का संगम समावेशी विकास की अगली सीमा है और आधार की सफलता की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि एआई के लाभ केवल छोटे से शहरी अभिजात वर्ग तक सीमित नहीं रहने चाहिए। ‘प्रौद्योगिकी को प्रत्येक नागरिक की सेवा करनी चाहिए, चाहे उसका भूगोल, लिंग या आय कुछ भी हो।’

उन्होंने कहा कि हालिया बजट में डेटा सेंटरों और क्लाउड अधोसंरचना के लिए मदद बढ़ाई गई है। इसके अलावा घरेलू कंप्यूट क्षमता को मजबूत बनाना, सेमीकंडक्टर निर्माण पर जोर देना, इलेक्ट्रॉनिक्स पीएलआई, एआई सेंटर ऑफ एक्सिलेंस आदि पर जोर देना जारी है।

First Published : February 17, 2026 | 10:58 PM IST