राजकोषीय प्रारूप में सुधार वक्त की मांग
राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान के निदेशक के तौर पर मेरा यह अंतिम लेख है। इसमें मेरा ध्यान मुख्यत: भारत की गंभीर राजकोषीय स्थिति पर होगा जिसके बारे में 2016 से ही मैं जिक्र करता रहा हूं। केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति की कमजोरी कुछ हद तक विरासत की उपज होने के साथ ही […]
वित्त मंत्री जब भी संसद में चालू वित्त वर्ष के बजट संबंधी नए आंकड़े पेश करेंगी, उस समय यह सच भी सामने आ जाएगा कि कोविड-19 ने अर्थव्यवस्था की वित्तीय स्थिति को तात्कालिक रूप से किस प्रकार प्रभावित किया है। इसके बाद चर्चा इसी विषय पर केंद्रित रहेगी। कोविड ने राजकोषीय स्थिति पर जो असर […]