Business Standard
Advertisement
Reliance Q1 Results: मुनाफा 22.3 फीसदी घटकर ₹20,946 करोड़ पर, रेवेन्यू में 25% का उछल‘होर्मुज संकट में भी नहीं थमी ट्रेनों की रफ्तार’, बोले PM मोदी: रेलवे के विद्युतीकरण ने देश को बचायामुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पर पूर्व जापानी मंत्री के बिगड़े बोल, भारत का करारा जवाब: तथ्यों से कोसों दूर हैं आरोपनिवेश अनुकूलता में गुजरात नंबर वन, लेकिन 60 का आंकड़ा भी नहीं छू सका कोई राज्य; नीति आयोग का खुलासाReliance Retail Q1 Results: नेट प्रॉफिट 14% घटकर ₹2,805 करोड़ पर, लेकिन रेवेन्यू मोर्चे पर मजबूती बरकराररिलायंस का धमाका: क्रूड के बढ़े दामों से O2C बिजनेस का रेवेन्यू 30% उछला, ₹2 लाख करोड़ के पारशरद पवार के अगले कदम पर टिकी महाराष्ट्र की राजनीति, सियासी चुप्पी किसी बड़े राजनीतिक समझौते का संकेतसिर्फ सुरक्षा नहीं, भू-अर्थशास्त्र के नए दौर में भारत को चाहिए स्पष्ट आर्थिक सुरक्षा रणनीतिEditorial: रूसी तेल खरीदने पर भारत को घेरने की तैयारी, अमेरिकी सीनेट में 100% टैरिफ लगाने का प्रस्तावअब डीमैट खातों पर भी मिलेगी SWP और STP की सुविधा, SEBI ने यूजर्स को दिया बड़ा तोहफा
'

PTI

- June,28 2012 4:53 PM IST

बयान के अनुसार अदालतों ने कहा है कि राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान देने से अपराध धुल नहीं जाता या न्यायिक फैसलों को अस्वीकृत नहीं किया जाता।

राष्ट्रपति के कार्यालय ने लंबे बयान में कहा कि राष्ट्रपति क्षमादान के अधिकार का इस्तेमाल करके न्यायिक फैसलों में बदलाव, संशोधन या उन्हें परिवर्तित नहीं करतीं।

बयान में कहा गया है, क्षमा मिलने पर अपराधियों की मौत की सजा को उनके शेष स्वाभाविक जीवन के लिए उम्रकैद में बदल दिया जाता है। जब राष्ट्रपति द्वारा सरकार की सहायता और सलाह पर दया याचिका को खारिज करने या स्वीकार करने का तर्कसंगत फैसला लिया जाता है तो राष्ट्रपति की ओर से संवैधानिक दायित्व अदा किया जाता है नाकि इसे यह कहेंगे कि उनके द्वारा उदारता दिखाई जाती या इसके विपरीत काम किया जाता है।

राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि मृत्युदंड एक भावनात्मक मुद्दा है जिस पर बहस चल रही है।

बयान के अनुसार, इस मामले में सोच विचार के साथ विमर्श और बहस की जरूरत है। जब तक मौत की सजा हमारे कानूनों का हिस्सा है और किसी अपराधी द्वारा या उसकी ओर से क्षमा मांगना संवैधानिक व्यवस्था में है तब तक राष्ट्रपति इस कर्तव्य को निभाने के लिए बाध्य हैं।

वक्तव्य के मुताबिक दया याचिकाओं को निपटाने में संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए राष्ट्रपति के फैसलों पर दिये गये बयान अनुचित हैं।

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement