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कौन बनाए गरीबों के लिए सस्ते घर

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Last Updated- December 08, 2022 | 4:40 AM IST

मंदी की आंच अब उत्तर प्रदेश सरकार  के फैसलों पर भी दिखाई देने लगी है।


लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद और बनारस के बाद अब मंदी अलीगढ़, इटावा, फिरोजाबाद, फैजाबाद, गोंडा और गोरखपुर सरीखे छोटे शहरों में बिल्डर सरकार की तरफ से गरीबों के लिए सस्ते घर बनाने के लिए तैयार नहीं हैं। हालत यहां तक आ गई है कि राज्य सरकार की सबसे सस्ती परियोजना कांशीराम शहरी आवास योजना को बनाने वालों का टोटा है।

लखनऊ जैसे बड़े शहरों में इस परियोजना को पूरा करने के लिए बिल्डर नहीं मिल पा रहे हैं। छोटे शहरों का तो कोई पुख्ता हाल ही नहीं मिल रहा है। ऐसा तब है जबकि सरकार सबसे कम कीमत पर शहरी मध्य वर्ग को आवास दे रही है।

गौरतलब है कि कांशीराम शहरी आवास योजना के तहत केवल 1.75 लाख रुपये में दो कमरे के आवास शहरी मध्य वर्ग को दिए जांएगे। इन आवासों को बनाने के लिए राज्य सरकार ने निजी बिल्डरों से आवेदन मांगे थे। राज्य सरकार के द्वारा मंगाई गई बोली में केवल कुछ शहरों के लिए ही निजी बिल्डरों ने अपनी रुचि दिखाई है।

इस योजना के तहत लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद जैसे प्रदेश के बड़े शहरों की ओर निजी बिल्डर रूख ही नहीं कर रहें है। एक निजी बिल्डर के मुताबिक इतनी कम कीमत में मकान बना पाना अंसभव है। लिहाजा बोली लगाने का कोई मतलब नहीं है। गौर किया जाए तो इटावा, फिरोजाबाद, गोरखपुर और गोंडा जैसे शहरों में बुनियादी और औद्योगिक विकास बहुत कम हुआ है।

ऐसे में निजी बिल्डर कंपनियां इन शहरों में उचित मुनाफा न निकल पाने के कारण नहीं आना चाहती है। जबकि लखनऊ, इलाहाबाद और बनारस जैसे शहरों में बुनियादी विकास के चलते कुछ बिल्डर कंपनियां अपना भाग्य आजमाने में पीछे नहीं हट रही है।

दूसरी बात यह भी है कि मंदी की मार से सबसे ज्यादा प्रभावित बिल्डर तबका ही हुआ है। ऐसे में वह कम मुनाफे वाली योजनाओं से परहेज करना ही उचित समझता है। सरकारी मान्यता प्राप्त एक बिल्डर ने कहा कि आने वाला समय काफी अनिश्चित है, इसलिए कोई भी परियोजना काफी जोखिम भरी है।

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First Published - November 20, 2008 | 9:10 PM IST

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