facebookmetapixel
जिस तरह अमेरिका ने वेनेजुएला से मादुरो को उठा लिया, क्या उसी तरह चीन ताइवान के साथ कर सकता है?कहीं आपकी जेब में तो नहीं नकली नोट? RBI ने बताया पहचानने का आसान तरीकाकई बड़े शहरों में नहीं बिक रहे घर! मेट्रो सिटी में अनसोल्ड घरों का लगा अंबार, 2025 में आंकड़ा 5.7 लाख के पारMCap: शेयर बाजार की तेजी में टॉप 7 कंपनियों का मुनाफा, ₹1.23 लाख करोड़ बढ़ा मार्केट कैपसाल की शुरुआत में FPIs ने निकाले 7,608 करोड़, विदेशी निवेशक रहे सतर्कMarket Outlook: इस हफ्ते बाजार में रुझान तय करेंगे मैक्रो डेटा और FII ट्रेडिंगUS Venezuela Attack: कौन हैं Nicolás Maduro? जिनके पकड़े जाने का दावा अमेरिका ने कियाWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड और घने कोहरे का कहर, IMD ने जारी की चेतावनीUP: लखनऊ में बनेगी AI सिटी, उत्तर प्रदेश को मिलेगा ग्लोबल टेक पहचानHealth Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय अधिकतर लोग क्या गलती करते हैं?

जोर पकड़ रही है मुखिया विकास निधि गठित करने की मांग

Last Updated- December 05, 2022 | 4:34 PM IST

बिहार में स्वास्थ्य और शिक्षा सहित समग्र ग्रामीण विकास के लिए पूरे तंत्र को लालफीताशाही से मुक्त कराने और वास्तविक मायने में विकास सुनिश्चित करने के लिए एक लाख से भी अधिक निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधियों ने सांसद और विधायक विकास निधि की तर्ज पर ‘मुखिया विकास निधि’ गठित करने की पुरजोर सिफारिश की है।


 निर्वाचित महिलाओं का मानना है कि ‘मुखिया विकास निधि’ के गठन से न केवल पंचायतों और गांवों में बुनियादी शिक्षा तथा स्वास्थ्य के विकास में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा, बल्कि इसके माध्यम से गांवों में ही जीवन व्यतीत करने वाले मुखिया या उपमुखिया की जवाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी तथा गांवों का विकास दिखाई भी देने लगेगा।


मुजफ्फरपुर जिले की दादर कोल्हुआ पंचायत की मुखिया अमिता देवी ने बताया कि यह एक क्रांतिकारी और जमीनी हकीकत वाला कदम होगा। इससे स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सही मायने में लोगों को घर-घर तक लाभ पहुंचेगा।


रोहतास जिले की चिताली पंचायत की उपमुखिया तारामुनी देवी ने रोषपूर्ण शब्दों में कहा कि पूरी पंचायत के विकास को अधिकारी अपनी मुट्ठी में रखते हैं और जनप्रतिनिधियों को उनका मुंह ताकना पडता है।


अधिकारी का तबादला हो जाए तो वह पलट कर दोबारा पूरे जीवन में उस पंचायत की ओर देखता भी नहीं। ऐसे में निर्वाचित प्रतिनिधि केवल हाथ मसलकर रह जाते हैं।


तारामुनि देवी ने कहा कि सांसद विकास निधि के तहत दो करोड़ रुपया और विधायक विकास निधि के तहत एक करोड़ रुपये का प्रावधान है, जो सांसद या विधायक के आदेश पर अधिकारी द्वारा खर्च किया जाता है।


लेकिन पंचायत के मुखिया को एक पैसे का भी आदेश देने का अधिकार नहीं है।


सीवान जिले की मीरजुमला पंचायत की वार्ड सदस्य सविता देवी ने इस सिलसिले में कहा कि मुखिया पंचायत विकास निधि के तहत मुखिया को मुख्य रूप से बुनियादी जरूरतों के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल के कामों के लिए कम से कम पांच लाख रुपये और वार्ड सदस्य को दो लाख रुपये वार्षिक का अधिकार मिलना चाहिए।


बेशक यह धन अधिकारी के माध्यम से ही खर्च हो जैसा कि सांसद और विधायक निधि के तहत प्रावधान किया गया है।

First Published - March 14, 2008 | 8:43 PM IST

संबंधित पोस्ट